ट्यूबवेल योजना के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन। एसडीएम को राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, 27 जनवरी को आंदोलन की चेतावनी।
मिशनसच न्यूज, किशनगढ़ बास। सरकार द्वारा रूंध गिदावड़ा–बृसंगपुर क्षेत्र में बोरिंग कर पानी ले जाने के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को मेवात क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने एसडीएम को राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 27 जनवरी को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
राधिका गार्डन में हुई जनसभा
सोमवार को सुबह 12 बजे मेवात क्षेत्र के ग्रामीण राधिका गार्डन में एकत्रित हुए। इस दौरान मेव पंचायत के प्रवक्ता मोहम्मद कासिम मेवाती ने पत्रकारों को बताया कि यह योजना पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनाई गई थी और वर्तमान सरकार इसे अमल में लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रीन ट्रिब्यूनल व अरावली संरक्षण परियोजना पर भी सीधा हमला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना के जरिए मेवात क्षेत्र के जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर किसान और मजदूरों की आजीविका पर संकट खड़ा किया जा रहा है। जल, जमीन और जंगल ही मेवात अंचल की जीवनरेखा हैं, जिन्हें छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने संविधान के तहत अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
मुख्य मार्गों से प्रदर्शन कर पहुंचे एसडीएम कार्यालय
ग्रामीण मुख्य मार्गों से नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम मनीष जाटव को राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि भूजल दोहन के कारण अलवर के विजयमंदिर व जयसमंद बांध क्षेत्र पहले ही जल संकट से जूझ रहे हैं। इसी अनुभव के आधार पर पूर्व में सिलीसेढ़ बांध क्षेत्र में प्रस्तावित पेयजल ट्यूबवेलों का किसानों ने विरोध कर उन्हें रुकवाया था।
अरावली क्षेत्र में ट्यूबवेल प्रस्ताव पर उठे सवाल
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि रूंध गिदावड़ा क्षेत्र की भूमि ‘गैर मुमकिन बीहड़’ श्रेणी में आती है और यह अरावली पर्वतमाला के संरक्षित क्षेत्र में शामिल है। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत 40 ट्यूबवेल स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है, जो अरावली नोटिफिकेशन 1992 के अंतर्गत पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके साथ ही न तो एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट किया गया है और न ही एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान उपलब्ध कराया गया है।
ग्रामीणों ने मांग की कि योजना को तत्काल निरस्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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