प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा भवनों की बदहाली पर तीखी बहस, आंकड़ों से उठाए सवाल
मिशनसच न्यूज, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पुख्ता आंकड़ों के साथ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को कटघरे में खड़ा करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की हालत चिंताजनक हो चुकी है। कई स्थानों पर स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, तो कहीं खुले मैदानों, मंदिरों, अस्पतालों, मुर्गी फार्म तक में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नौनिहालों का भविष्य अंधकार में है, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा
टीकाराम जूली ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 45,365 स्कूल संचालित हैं, जिनमें से लगभग 41,178 स्कूलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 3,768 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हैं, लेकिन सरकार ने अब तक केवल 2,558 स्कूलों को ही आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित किया है। शेष 1,210 स्कूलों की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इन बदहाल स्कूलों के पुनरुद्धार के लिए सरकार ने अब तक कितना बजट स्वीकृत किया है।
बच्चों की बजाय तबादलों में व्यस्त सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों को जर्जर भवनों से हटाकर 5 से 10 किलोमीटर दूर अन्य स्कूलों में भेज रही है, लेकिन उनके लिए किसी प्रकार की परिवहन व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार नई स्कूल इमारतें बनाने में रुचि नहीं ले रही, बल्कि पूरी तरह तबादलों के खेल में उलझी हुई है।
मंत्री की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
चर्चा के दौरान टीकाराम जूली ने शिक्षा मंत्री की कार्यकुशलता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस मंत्री से ‘Knowledge’ शब्द की सही स्पेलिंग तक नहीं लिखी जाती, उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने सत्ता पक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने और माइक बंद करने के आरोप भी लगाए।
OBC छात्रवृत्ति को लेकर जवाब तलब
नेता प्रतिपक्ष ने ओबीसी छात्रवृत्ति का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले दो वर्षों में कितने ओबीसी विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया और वास्तव में कितनों को इसका लाभ मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और पिछड़े वर्ग के अधिकारों की अनदेखी कर रही है।
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