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    श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में बच्चों ने सीखा अहिंसा का संदेश

    संस्कार शिक्षण शिविर में गूंजा णमोकार मंत्र, प्रश्नोत्तरी में बच्चों ने दिखाया ज्ञान

    कठूमर। श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कठूमर में आयोजित 11 दिवसीय ‘श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर-2026’ के तीसरे दिन शनिवार को शिविरार्थियों का उत्साह चरम पर रहा। धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों पर आधारित इस शिविर में बच्चों ने अहिंसा, संयम और त्याग के महत्व को समझते हुए जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

    शिविर प्रभारी सोनेश जैन तथा संयोजक वर्षा जैन, विधी जैन एवं आतिश्य लकी जैन के निर्देशन में प्रातः 8 बजे मंगलाचरण, भक्तामर स्तोत्र पाठ एवं णमोकार महामंत्र के जाप के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विद्वत् पंडित सोनेश जैन ने बच्चों को ‘अहिंसा परमो धर्म’ का वास्तविक मर्म समझाते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना ही सच्ची अहिंसा है।

    संस्कार शिक्षण शिविर में दिए गए विशेष संस्कार

    शिविर के दौरान बच्चों को रात्रि भोजन त्याग, छना हुआ पानी पीने तथा जीव दया जैसे जैन धर्म के महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी दी गई। साथ ही इन नियमों के आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों पर भी प्रकाश डाला गया।

    णमोकार मंत्र पाठ और प्रश्नोत्तरी रही आकर्षण का केंद्र

    बालक-बालिकाओं ने सामूहिक रूप से णमोकार मंत्र का सस्वर पाठ कर वातावरण को धर्ममय बना दिया। वहीं जैन तीर्थंकरों, जैन सिद्धांतों एवं इतिहास पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

    महिला अध्यक्ष इंदिरा जैन ने बताया कि शिविर के तीसरे दिन 30 बच्चों की उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि शिविर में दिए जा रहे संस्कारों का सकारात्मक प्रभाव बच्चों के व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    कार्यक्रम में अध्यक्ष मुकेश जैन, पूर्व अध्यक्ष विजयपाल जैन, पारस जैन, जितेंद्र जैन, शीतल जैन, शिप्रा जैन, पूनम जैन, मंजू जैन एवं सुषमा जैन सहित अनेक समाजजन ने व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

    7 जून तक जारी रहेगा संस्कार शिक्षण शिविर

    शिविर संयोजकों ने बताया कि यह शिविर 7 जून तक प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक संचालित होगा, जिसमें जैन दर्शन, नैतिक शिक्षा, योग एवं संस्कारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से शिविर में भेजने की अपील की गई है।

    उल्लेखनीय है कि यह शिविर युगदृष्टा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित किया जा रहा है।

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