सामाजिक न्याय के मुद्दों पर कांग्रेस मुखर, संविदा नर्सिंगकर्मियों के आंदोलन को लेकर भाजपा सरकार पर साधा निशाना
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरुआत से ही सामाजिक न्याय की पक्षधर रही है। पार्टी की नीतियों ने हमेशा समाज के कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने का काम किया है। कांग्रेस की समावेशी सोच और सामाजिक न्याय की नीति ने वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती देने का काम किया है।
जूली शनिवार को भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों, संगठन को मजबूत करने तथा समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
संविधान की रक्षा सभी का कर्तव्य
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पिछले कई दशकों से समाज के पिछड़े और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए मुखर होकर आवाज उठाती रही है। पार्टी ने सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया है।
उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान देश के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों एवं सामाजिक न्याय की गारंटी है। संविधान की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है और इसके मूल्यों को मजबूत करना जरूरी है।
शहीदों की स्मृति में निकाला पैदल मार्च
भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से शहीद स्मारक तक पैदल मार्च आयोजित किया गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पैदल मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
संविदा नर्सिंगकर्मियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
संविदा कर्मचारियों और विशेष रूप से संविदा नर्सिंगकर्मियों के आंदोलन को लेकर टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार कर्मचारियों की पीड़ा सुनने तक को तैयार नहीं है।
जूली ने कहा कि प्रदेश में कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते-करते टूट रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने संविदा नर्सिंगकर्मी दीपक खारवाल का उल्लेख करते हुए कहा कि मांगों और मानसिक तनाव के चलते उन्होंने करीब दो माह पूर्व आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उनकी धर्मपत्नी ने भी गंभीर मानसिक तनाव में आत्महानि का प्रयास किया। जूली के अनुसार, दोनों घटनाओं के दौरान उन्होंने एसएमएस अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार और आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगें सुनी थीं।
पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन करने पर जताई चिंता
जूली ने कहा कि पिछले करीब 30 घंटे से संजीता चौधरी, विमल शर्मा और रॉबिन शर्मा जयपुरिया अस्पताल के पास पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में युवाओं, कर्मचारियों और आमजन को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए पानी की टंकियों पर चढ़ना पड़े और रात-रातभर सड़कों पर धरना देना पड़े, वहां सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने की मांग की।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


