अलवर में सरिस्का CTH बदलाव को लेकर संगठनों ने बताया विकास के लिए जरूरी कदम
अलवर। सरिस्का टाइगर रिजर्व के कोर क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव को लेकर अलवर के उद्योग और व्यापारिक संगठनों ने अपना समर्थन जताया है।
संगठनों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। अलवर जिला प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा से समृद्ध रहा है, जहां करीब 500 खनिज आधारित इकाइयां संचालित हो रही हैं। इनसे लगभग 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है और सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
संगठनों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरिस्का क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों के कारण खनन और पर्यटन उद्योग प्रभावित हुए हैं, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि CTH क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य केवल खनन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की सिफारिशों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
संगठनों ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों को CTH से बाहर किया जा रहा है, वे अधिकांशतः वन्यजीवों के लिए उपयुक्त नहीं हैं और मानव गतिविधियों के कारण पहले से प्रभावित हैं।
इसके साथ ही उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि इस बदलाव से किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी या सरिस्का को नुकसान पहुंचेगा।
उद्योग संगठनों का मानना है कि यह निर्णय अलवर के विकास, रोजगार सृजन और पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक साबित होगा।
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