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    अपनी सल्तनत कायम करने बाघ एक-दूसरे पर कर रहे हमले, 9 साल में 9 की मौत

    टाइगर रिजर्व में क्षमता से अधिक बाघ होने पर आपसी संघर्ष तेज

    सवाई माधोपुर। राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या अब उनके लिए ही खतरा बनती जा रही है। अपनी-अपनी टेरिटरी स्थापित करने की होड़ में बाघ एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं, जिससे पिछले 9 वर्षों में 9 बाघों की मौत हो चुकी है। इस स्थिति को लेकर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने भी चिंता जताई है।

    देश में टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 1973 में हुई थी और उसी वर्ष रणथंभौर राजस्थान का पहला टाइगर रिजर्व बना। बाद में 1980 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया।

    वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार, रणथंभौर का क्षेत्रफल अधिकतम 45 से 55 बाघों के लिए उपयुक्त है, लेकिन वर्तमान में यहां करीब 77 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं। संख्या बढ़ने से जंगल का लगभग हर क्षेत्र बाघों से भर चुका है, जिससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

    एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार एक बाघ को 40 से 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है, लेकिन रणथंभौर में एक बाघ के हिस्से औसतन केवल 22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ही आ रहा है। इस कारण बाघों की टेरिटरी घटकर 18 से 28 किलोमीटर तक सीमित हो गई है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि शावक करीब 2 साल तक अपनी मां के साथ रहते हैं, इसके बाद वे अपनी अलग टेरिटरी की तलाश में निकलते हैं। इस दौरान युवा बाघ अक्सर पुराने और कमजोर बाघों पर हमला कर उनकी जगह पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे संघर्ष और बढ़ जाता है।

    वन विभाग के अनुसार वर्तमान में रिजर्व में लगभग 21 बाघ, 20 बाघिन और 16 से अधिक शावक हैं, जबकि दूसरे डिवीजन में भी 10 से ज्यादा बाघ-बाघिन मौजूद हैं। अधिक संख्या के कारण अब बाघ नए क्षेत्रों की तलाश में जंगल की सीमाओं से बाहर भी निकल रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बाघों के सुरक्षित आवागमन के लिए कॉरिडोर विकसित नहीं किए जाते या उन्हें अन्य क्षेत्रों में शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

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