पुनर्गठन से स्वायत्तता पर खतरे की आशंका, नियंत्रण नहीं सहयोग की अपील
अलवर। प्रख्यात रंगकर्मी एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित दौलत वैद ने देश की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं के संभावित पुनर्गठन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि संस्थाओं की स्वायत्तता और उनकी विशिष्ट पहचान को प्रभावित करने वाला कदम बताया है।
दौलत वैद के अनुसार, यदि कला एवं संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं को केंद्रीकृत नियंत्रण में लाया जाता है, तो रचनात्मक स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में संस्कृति ‘निर्देशों’ तक सीमित होकर रह जाएगी, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) जैसी संस्थाओं की अपनी अलग पहचान, कार्यशैली और उद्देश्य हैं। इन सभी को एक ही ढांचे में समेटना सांस्कृतिक विविधता को नुकसान पहुंचा सकता है।
दौलत वैद ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का पुनर्गठन “नियंत्रण” की भावना से नहीं, बल्कि “सहयोग” के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। इससे न केवल संस्थाओं की स्वतंत्रता बनी रहेगी, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता और रचनात्मकता भी सुरक्षित रह सकेगी।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संस्थाएं देश की पहचान और विरासत का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इनके स्वरूप में बदलाव करते समय सभी पक्षों की राय और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
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