जैन इतिहास की धरोहर सुंडियाना में खंडहर मंदिर बना पहचान, संरक्षण की उठी मांग
कठूमर। अलवर जिले के कठूमर उपखंड स्थित सुंडियाना गांव आज भले ही एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में दिखाई देता हो, लेकिन लगभग 500 से 600 वर्ष पूर्व यह जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख केंद्र और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण गढ़ हुआ करता था। कभी यहां सैकड़ों जैन परिवार निवास करते थे और गांव का सर्राफा बाजार सोने-चांदी तथा हीरा-जवाहरात के कारोबार के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था।
गांव में आज भी मौजूद प्राचीन जैन मंदिर उस गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है। जर्जर अवस्था में खड़ा यह मंदिर अपनी एक से डेढ़ मीटर मोटी दीवारों के माध्यम से प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक समृद्धि की कहानी बयां करता है। समय के साथ मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया, लेकिन इसकी संरचना आज भी अपने वैभव की झलक प्रस्तुत करती है।
52 दुकानों से आबाद था बाजार
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार मंदिर के आसपास सर्राफा व्यापार की 52 बड़ी दुकानें संचालित होती थीं। इसके अलावा अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी यहां मौजूद थे। यही कारण है कि आज भी गांव का वह क्षेत्र ‘बाजार’ के नाम से जाना जाता है। जैन व्यापारी सोने-चांदी और हीरा-जवाहरात के व्यवसाय में विशेष पहचान रखते थे तथा उनकी व्यापारिक पहुंच देश के विभिन्न हिस्सों तक थी।
बाढ़ ने उजाड़ दिया समृद्ध नगर
ग्रामीणों के अनुसार कालांतर में आई भीषण बाढ़ ने गांव के वैभव को गहरा आघात पहुंचाया। प्राकृतिक आपदा के कारण भारी जन-धन हानि हुई, जिसके बाद अधिकांश जैन परिवारों और व्यापारियों ने अन्य क्षेत्रों में पलायन कर लिया। धीरे-धीरे यह समृद्ध व्यापारिक एवं धार्मिक केंद्र वीरान होता चला गया। जैन समाज की प्राचीन प्रतिमाओं को सुरक्षित रखते हुए कठूमर और खेरली के जैन मंदिरों में स्थापित कर दिया गया था।
मत्स्य प्रदेश के इतिहास से जुड़ा है गांव
सुंडियाना क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से मत्स्य प्रदेश और तत्कालीन अलवर रियासत का हिस्सा रहा है। यह पूरा अंचल धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि परंपराओं के लिए जाना जाता रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के चलते यहां से जैन समाज का पलायन हुआ।
जैन समाज ने किया स्थल का अवलोकन
प्राचीन जैन मंदिर एवं सुंडियाना के इतिहास को लेकर कठूमर जैन समाज का एक प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में मुकेश जैन, विजयपाल जैन, बसंत कुमार जैन, अशोक जैन (पत्रकार), संजय जैन एवं प्रदीप जैन शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्राचीन जैन मंदिर का अवलोकन किया तथा गांव के प्रमुख लोगों से चर्चा कर ऐतिहासिक जानकारियां प्राप्त कीं।
ग्रामीणों एवं जैन समाज के लोगों ने पुरातत्व विभाग तथा प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और जैन संस्कृति की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें।
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