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    स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित मुस्लिम युवा बना विचारों का संदेशवाहक

    पीएचडी से लेकर पांच पुस्तकों तक, गांव-ढाणियों में युवाओं को जोड़ रहे डॉ. जुल्फिकार

    मिशनसच न्यूज, जयपुर। युवाओं के आदर्श कहे जाने वाले स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर भीमसर गांव के मुस्लिम युवा डॉ. जुल्फिकार ने न केवल स्वामी विवेकानंद पर पीएचडी की, बल्कि उनके जीवन और विचारों पर पांच पुस्तकें लिखकर उन्हें गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आज वे प्रतिदिन गांव-ढाणियों में जाकर युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से परिचित करा रहे हैं।

    भीमसर निवासी शोधकर्ता डॉ. जुल्फिकार मुस्लिम होने के बावजूद स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं और बीते कई वर्षों से उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। वे कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता, राष्ट्रनिर्माण और युवाशक्ति को दिशा देने वाले हैं।

    डॉ. जुल्फिकार के पिता जाफर हुसैन हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड, खेतड़ी से सेवानिवृत्त हुए हैं। इसी कारण उनका बचपन खेतड़ी में बीता। महज 11 वर्ष की उम्र से ही वे रामकृष्ण मिशन जाने लगे थे। शुरुआत मिशन के पुस्तकालय में अखबार पढ़ने से हुई, जो आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन से जुड़ी पुस्तकों के अध्ययन में बदल गई।
    डॉ. जुल्फिकार का दावा है कि रामकृष्ण मिशन खेतड़ी पर पीएचडी करने वाले वे देश के पहले मुस्लिम युवा हैं। उन्होंने वर्ष 2005 से 2009 के बीच स्वामी विवेकानंद पर गहन शोध किया, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।

    70,652 विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क बांटे

    पिछले 7 वर्षों से डॉ. जुल्फिकार स्वामी विवेकानंद से जुड़े संदेशों वाले कैलेंडर नि:शुल्क वितरित करने का अभियान चला रहे हैं। अब तक 70,652 कैलेंडर दिल्ली सहित राजस्थान के जयपुर, बीकानेर, सीकर, चूरू, हनुमानगढ़, झुंझुनूं सहित कई जिलों के राजकीय-गैर राजकीय विद्यालयों, मदरसों, वेद विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वितरित किए जा चुके हैं।

    वे स्वयं भीमसर, नूआं, सिरियासर, आबूसर, अलसीसर, मलसीसर, टमकोर सहित अनेक गांवों में पहुंचकर युवाओं से संवाद करते हैं। उनके हाथ में भगवा नहीं, बल्कि किताबें होती हैं और जुबान पर केवल प्रेरणा। उनका लक्ष्य एक लाख युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार पहुंचाना है। विवेकानंद कैलेंडर 2026 सभी धर्मों के प्रति समान आदर, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है तथा एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है।

    2020 से शुरू हुआ विवेकानंद कैलेंडर अभियान

    राष्ट्रीय युवा दिवस 2020 पर स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित आरएसएस मुख्यालय केशव कुंज, झंडेवालान में विवेकानंद कैलेंडर का विमोचन किया गया था। इस अवसर पर आरएसएस के वरिष्ठ नेता एवं थिंक टैंक डॉ. इन्द्रेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रचारक मौजूद रहे। तभी से यह कैलेंडर लगातार नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं।

    तीन देशों के मठों में रहकर किया अध्ययन

    डॉ. जुल्फिकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों के तहत बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे इन देशों के रामकृष्ण मठों व मिशन संस्थाओं में रहकर अध्ययन करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम प्रोफेसर हैं। उन्होंने देश के प्रसिद्ध वेलूर मठ सहित 50 से अधिक रामकृष्ण मठों और मिशन संस्थाओं में रहकर स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन के सामाजिक कार्यों का गहन अध्ययन किया।

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