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    हनुमान जयंती से पहले सिलेंडर संकट, भंडारे की तैयारियों पर संकट के बादल

    हनुमान जयंती से पहले सिलेंडर संकट, भंडारे की तैयारियों पर संकट के बादल

    किशनगढ़ बास। “तुम रक्षक काहू को डर ना”, “आपन तेज सम्हारो आपै”, “तीनों लोक हांक ते कांपे” जैसे जयघोषों के बीच संकटमोचन हनुमान जी महाराज के जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार आयोजन से पहले गैस सिलेंडर की किल्लत ने हनुमान भक्तों की चिंता बढ़ा दी है।

    बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल को आयोजित होने वाले भंडारे के लिए आयोजकों को लाख प्रयासों के बावजूद गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। एजेंसी संचालकों ने प्रशासनिक सख्ती का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में आयोजक असमंजस में हैं कि भंडारे की व्यवस्था कैसे की जाए।

    विडंबना यह है कि जिस प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत घर-घर गैस पहुंचाकर लकड़ी के धुएं से मुक्ति दिलाने की पहल की गई थी, आज उसी के दौर में सिलेंडर न मिलने से हनुमान भक्तों को फिर से लकड़ी की भट्टियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    आयोजकों का कहना है कि भंडारे में हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, जिसके लिए बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है। वर्तमान स्थिति में सिलेंडर की कमी के चलते न केवल आयोजक बल्कि आम उपभोक्ता भी परेशान हैं और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं।

    इस बीच भक्तों में यह चर्चा भी है कि यदि ऐसी स्थिति का पूर्वाभास होता, तो शायद हनुमान जी के भक्त भी पहले से ही गैस सिलेंडर की व्यवस्था कर लेते।

    किशनगढ़ बास के पुराना बाजार स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी हनुमान जयंती धूमधाम से मनाने की तैयारियां जारी हैं। 1 अप्रैल को मंदिर में अखंड रामायण पाठ होगा तथा भव्य झांकी निकाली जाएगी, जो मुख्य बाजार, गंज रोड, नगर पालिका कार्यालय, काले खां बाग, अलवर रोड, तोप सर्किल और पंचायत घर होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी।

    2 अप्रैल को अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति के बाद हवन यज्ञ होगा और फिर भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पुरी, आलू-कोले की सब्जी और बूंदी का प्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार हर वर्ष 4 से 5 हजार श्रद्धालु भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसकी व्यवस्था व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के सहयोग से की जाती है।

    हालांकि इस बार गैस सिलेंडर संकट के चलते आयोजन की तैयारियों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

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