बजट में टैबलेट, साइकिल और यूनिफॉर्म जैसे प्रावधान सराहनीय, लेकिन स्थायी भर्ती और आधारभूत ढांचे के लिए ठोस योजना की मांग तेज
जयपुर। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत 6,10,956 करोड़ रुपये के बजट में गत वर्ष की तुलना में 9.37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कई जनकल्याणकारी घोषणाएं की गई हैं, जिनमें मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण, 9वीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल, कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को मुफ्त यूनिफॉर्म तथा छात्राओं के लिए टॉयलेट निर्माण जैसे प्रावधान शामिल हैं। साथ ही कॉलेजों के क्रमोन्नयन की घोषणा भी की गई है।
इन योजनाओं को विद्यार्थियों की सुविधा और प्रोत्साहन की दृष्टि से सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन शिक्षा जगत से जुड़े प्रो.रमेश बैरवा (प्रदेश संयोजक) का मानना है कि बजट में सबसे जरूरी मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। बड़ी संख्या में जर्जर और जानलेवा हो चुके विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की मांग लंबे समय से उठ रही है।
इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों, पीटीआई, लाइब्रेरियन तथा अन्य कर्मचारियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में स्थायी भर्ती की स्पष्ट घोषणा की उम्मीद थी, जो इस बजट में नजर नहीं आई।
कई वर्षों से कार्यरत विद्या संबल गेस्ट फैकल्टी भी नियमितीकरण की राह देख रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ भी चिंता का विषय बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासनिक दबाव और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है, जिससे गंभीर परिणाम तक सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, रिक्त पदों को भरने और शिक्षकों को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, तभी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव होगा।
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