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    आजादी के उत्सव में आत्मनिर्भरता की झलक, ‘जय माता दी’ समूह के उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र

    रायपुर :  आजादी का अर्थ केवल बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने और अपने पैरों पर खड़े होने की स्वतंत्रता भी है। यही भावना आज महिला स्व-सहायता समूहों के रूप में साकार हो रही है, जहां महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाकर परिवार और समाज की प्रगति में योगदान दे रही हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर कोरबा में लगा ‘जय माता दी’ स्व-सहायता समूह का स्टॉल इसी आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। तिरंगे के रंगों और देशभक्ति की भावना से सजे इस स्टॉल में समूह की महिलाओं के हुनर, रचनात्मकता और मेहनत की झलक देखने को मिल रही है।

    रजगामार, कोरबा की कीर्ति प्रजापति से जुड़ा ‘जय माता दी’ स्व-सहायता समूह 13 महिलाओं का समूह है। वर्ष 2019 से समूह के साथ जुड़कर कीर्ति प्रजापति सहित अन्य महिलाएं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने हुनर को आजीविका का साधन बना रही हैं। समूह की महिलाएं रचनात्मकता और मेहनत के साथ आकर्षक उत्पाद तैयार करती हैं, जिन्हें विभिन्न अवसरों पर स्टॉल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाता है।

    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में लगाए गए समूह के स्टॉल को विशेष रूप से देशभक्ति की थीम पर सजाया गया है। यहां कॉफी मग, टी-शर्ट, मैजिक मिरर, मैजिक मग सहित तिरंगा थीम पर आधारित विभिन्न आकर्षक वस्तुएं उपलब्ध हैं। इन उत्पादों में 15 अगस्त की देशभक्ति और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। स्टॉल पर पहुंचने वाले लोग इन उत्पादों को देखकर आकर्षित हो रहे हैं और समूह की महिलाओं के हुनर की सराहना भी कर रहे हैं।

    समूह की महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए कलेक्टर कुणाल दुदावत भी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित स्टॉल पर पहुंचे। उन्होंने समूह की महिलाओं से बातचीत कर उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं के कार्य की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और स्टॉल से वस्तुओं की खरीदारी भी की। कलेक्टर दुदावत द्वारा किए गए इस प्रोत्साहन से समूह की महिलाओं में विशेष उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला।

    प्रजापति बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपने हुनर को आगे बढ़ाने और नई चीजें सीखने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे का सहयोग करते हुए अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। उनके लिए कलेक्ट्रेट परिसर में स्टॉल लगाने का अवसर अपने उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने और अपनी पहचान बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    15 अगस्त के अवसर पर तिरंगे के रंगों में सजा यह स्टॉल केवल देशभक्ति की भावना को प्रदर्शित नहीं कर रहा, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन और स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने का संदेश भी दे रहा है।

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