बाबाधाम में रक्षाबंधन महोत्सव पर हजारों श्रद्धालुओं ने किए ऋणमुक्तेश्वर गौरी शंकर महादेव के दर्शन, सहस्त्रधारा और महाआरती में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
भीलवाड़ा। श्री बाबाधाम मंदिर में अध्यक्ष विनीत अग्रवाल के सानिध्य में सहस्त्रधारा, रुद्राभिषेक एवं रक्षाबंधन महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। धार्मिक आयोजन में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और पूरा मंदिर परिसर भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने ऋणमुक्तेश्वर गौरी शंकर महादेव के दर्शन कर रुद्राभिषेक में भाग लिया।
मंदिर परिसर में ऋणमुक्तेश्वर गौरी शंकर महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर की विशेष मान्यता के अनुसार प्रत्येक गुरुवार को यहां महादेव को चने की दाल अर्पित की जाती है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार इससे पितृ ऋण, मातृ ऋण और सखा ऋण से मुक्ति की कामना की जाती है। श्रद्धालुओं के लिए चने की दाल मंदिर की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
आकर्षक रोशनी से सजा शिव दरबार
रक्षाबंधन महोत्सव के अवसर पर श्री बाबाधाम के शिव दरबार को रंग-बिरंगी झिलमिलाती रोशनी, फरियों तथा फल-फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और भोले बाबा के जयकारे गूंजते रहे।
श्री बाबाधाम के पंडित गौतम गोविंद एवं अन्य पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना शुरू कराई। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, पंचामृत, गन्ने के रस सहित विभिन्न द्रव्यों से भगवान शिव का अभिषेक किया। बिल्वपत्र, आक के फूल और धतूरा भी भगवान शिव को अर्पित किए गए।
1008 किलो दूध से हुआ रुद्राभिषेक
महोत्सव के तहत शाम 4:15 बजे से 1008 किलो दूध से रुद्राभिषेक शुरू हुआ, जो शाम 7:15 बजे तक चला। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ रुद्राभिषेक में सहभागिता की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में दूध की निःशुल्क व्यवस्था भी की गई। वहीं श्री मां अन्नपूर्णा वैष्णो देवी का भव्य श्रृंगार किया गया। महिला मंडल की ओर से भजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न भजनों की प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
त्रिशूल पर राखी बांधने के लिए लगी कतार
रक्षाबंधन महोत्सव का विशेष आकर्षण मां मंशापूर्ण माताजी के त्रिशूल पर राखी बांधने की परंपरा रही। श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष में एक बार कष्ट निवारण की कामना से त्रिशूल पर राखी बांधने का अवसर मिलता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं को राखियां निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।
सहस्त्रधारा एवं रुद्राभिषेक के समापन के बाद महाआरती आयोजित की गई। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आरती के बाद सभी भक्तों को ठंडाई का प्रसाद वितरित किया गया।
मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद सेवादारों ने व्यवस्थाओं को संभाले रखा, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन एवं सहस्त्रधारा रुद्राभिषेक में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। आयोजन के दौरान ‘हर-हर महादेव’, ‘जय माता दी’, ‘जय बाबा बालाजी’ और ‘जय बाबा’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंजता रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने आयोजन में पहुंचकर धर्मलाभ लिया।
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