रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य में हाल ही में संपन्न हुए युवा कांग्रेस के आंतरिक संगठनात्मक चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली और फर्जीवाड़े का गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान फर्जी वोटिंग और मतदाताओं से जबरन ओटीपी (OTP) मांगने जैसी गंभीर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर आक्रोशित उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं ने अब अपनी शिकायतें सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुँचा दी हैं। प्राप्त दावों के अनुसार, प्रदेश भर से लगभग 400 से अधिक लिखित शिकायतें केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण को भेजी जा चुकी हैं।
राष्ट्रीय नेतृत्व के दरबार तक पहुँचा विवाद
बताया जा रहा है कि युवा कांग्रेस चुनावों में मचे इस घमासान का विवाद अब पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुँच चुका है। विभिन्न शिकायतकर्ताओं और असंतुष्ट उम्मीदवारों ने चुनाव प्राधिकरण से पुरजोर माँग की है कि पूरे चुनावी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच कराई जाए और आगामी परिणामों पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक इस फर्जी वोटिंग और तकनीकी गड़बड़ी की पूरी जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक चुनाव के आधिकारिक परिणाम घोषित नहीं किए जाने चाहिए।
क्या है पूरा चुनावी फर्जीवाड़े का मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के इस सांगठनिक चुनाव में कुल लगभग 14 लाख 56 हजार वोट पड़ने की बात सामने आई थी। इसी बीच, प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रमुख प्रत्याशी विनय शील ने मतदान प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप लगाते हुए पूरी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर चुनाव में इस्तेमाल किए जाने वाले आधिकारिक ‘With IYC’ ऐप में तकनीकी खामी या किसी बाहरी और आंतरिक हस्तक्षेप की उच्चस्तरीय जाँच कराने की माँग की है।
प्रत्याशी विनय शील के गंभीर दावे और आरोप
उम्मीदवार विनय शील ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दावा किया है कि उनके ऐप खाते में अचानक सात नए ‘अनपेड वोट’ जुड़ गए हैं। उनके अनुसार, इन संदेहास्पद वोटों में से एक वोट सूरजपुर से, चार वोट खैरागढ़-छुईखदान से और दो वोट कोरबा जिले से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि ये सभी सातों विवादित वोट प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे क्रमांक चार के प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज हुए हैं। विनय शील का कहना है कि उन्होंने इन सातों वोटों के लिए किसी भी प्रकार से स्वयं कोई मतदान या प्रचार नहीं कराया था, जो सीधे तौर पर ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर सेंधमारी की ओर इशारा करता है।


