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    पुतिन से डील होते ही अमेरिका के तेवर नरम, रूस पर बयानबाजी से बचने की सलाह

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में आए अचानक बदलाव के बाद अब वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। एक समय जो प्रशासन रूस को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर सौ फीसदी टैरिफ थोपने की योजना बना रहा था, उसने खुद रूस के साथ एक बड़ी तेल डील कर ली है। इस बड़े व्यापारिक समझौते के बाद से वाशिंगटन का रूस के प्रति दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल चुका है। इसी कड़ी में अब अमेरिका ने अपने सहयोगी यूरोपीय देशों को मॉस्को के खिलाफ आक्रामक और उकसावे वाले बयान देने से सख्त परहेज करने की हिदायत दी है।

    यूरोपीय सरकारों को पेंटागन की सख्त चेतावनी

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने यूरोपीय नेताओं को दो टूक शब्दों में कहा है कि वे रूस के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक बयानबाजी से दूर रहें। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यूरोपीय नेताओं के हालिया तीखे तेवर और बयान इस महाद्वीप की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं हैं। पेंटागन ने विशेष रूप से लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया समेत बाल्टिक क्षेत्र के कई देशों के नेताओं को चेतावनी दी है कि वे संयम से काम लें। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि पेंटागन की ओर से यह कड़ा संदेश बाल्टिक देशों के अलावा यूरोप की किन अन्य सरकारों तक पहुंचाया गया है। इस पूरी कूटनीतिक कवायद में पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी भी शामिल हैं, जो यूरोप में अमेरिकी सैन्य टुकड़ियों की तैनाती की समीक्षा करने वाले मुख्य अधिकारी हैं।

    एल्ब्रिज कोल्बी की सलाह और एस्टोनियाई पीएम का बयान

    सूत्रों के मुताबिक, एल्ब्रिज कोल्बी ने बाल्टिक देशों के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि रूस के खिलाफ अनावश्यक बयानों से बचा जाना चाहिए। इस दौरान अमेरिकी अधिकारी ने उन बयानों का विशेष रूप से हवाला दिया जिनमें यह दावा किया गया था कि यूक्रेन युद्ध में रूस बुरी तरह फंस चुका है और हताश होकर कदम उठा रहा है। इस हिदायत में विशेष रूप से एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिहाल के एक पुराने बयान का भी जिक्र किया गया। मिहाल ने सितंबर के आखिर में रूस पर निशाना साधते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तुलना एक ऐसे चूहे से की थी जो कोने में फंस चुका हो। अमरीकी पक्ष का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से तनाव कम होने के बजाय और अधिक भड़क सकता है।

    यूक्रेन युद्ध पर नई अमेरिकी रणनीति और नाटो में मतभेद

    यह पूरी चेतावनी ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन रूस के साथ सीधे बातचीत के जरिए यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के विकल्पों पर काम कर रहा है। इस शांति प्रक्रिया के तहत रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में कुछ ढील देने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार चल रहा है, जबकि साथ ही यूक्रेन पर भी रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने का दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, रूस से पैदा होने वाले संभावित खतरों को नाटो मंच पर सार्वजनिक रूप से कैसे पेश किया जाए, इसको लेकर पश्चिमी देशों के भीतर ही आंतरिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। नाटो के एक धड़े का मानना है कि रूस को लेकर लगातार चेतावनियां देने से मॉस्को को क्षेत्र में डर का माहौल बनाने का मौका मिलता है, जबकि दूसरे धड़े का तर्क है कि यूरोपीय नागरिकों को जमीनी खतरों से अवगत कराना अनिवार्य है ताकि वे रक्षा बजट और सुरक्षा तैयारियों के महत्व को समझ सकें।

    यूरोप में तोड़फोड़ की घटनाएं और बढ़ती सुरक्षा चिंताएं

    इस कूटनीतिक खींचतान के बीच पूरे यूरोप में संदिग्ध तोड़फोड़ की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में जर्मनी में दो बेलारूसी नागरिकों को देश के अहम और संवेदनशील ठिकानों पर आगजनी की साजिश रचने के गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, जर्मन प्रशासन ने पिछले महीने लीपजिग/हाले एयरपोर्ट पर हुए एक ड्रोन हमले के प्रयास के पीछे सीधे तौर पर रूस का हाथ होने का आरोप लगाया था, हालांकि मास्को ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इन तमाम सुरक्षा चुनौतियों के बीच अमेरिकी हिदायतों ने यूरोपीय राजधानियों में नई बहस छेड़ दी है।

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