More
    Homeराज्य48 कोस कुरुक्षेत्र के गांवों में आध्यात्मिक पुनरुत्थान की तैयारी, समिति सदस्य...

    48 कोस कुरुक्षेत्र के गांवों में आध्यात्मिक पुनरुत्थान की तैयारी, समिति सदस्य ने सुझाया मॉडल

    कुरुक्षेत्र। महाभारत कालीन 48 कोस की पावन परिधि के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के प्राचीन तीर्थ और देवालय केवल धार्मिक कर्मकांडों या पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं। ये पवित्र स्थल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक सद्भाव, युवा शक्ति के निर्माण और आध्यात्मिक चेतना के सर्वांगीण विकास के बड़े केंद्र बन सकते हैं। इस दिशा में एक 'तीर्थ केंद्रित समग्र ग्राम विकास एवं आध्यात्मिक नीति' तैयार करके न केवल भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा सकता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक व्यवस्था और बुनियादी ढांचे का भी पूर्ण कायाकल्प संभव है। 48 कोस तीर्थ मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य रामधारी शर्मा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री कार्यालय से सकारात्मक पहल का आश्वासन मिला है, जिससे इन तीर्थों के माध्यम से ग्रामीण पुनरुत्थान मॉडल के लागू होने की नई उम्मीदें जगी हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड भी इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने में गंभीरता से जुटा हुआ है।

    आध्यात्मिक चेतना और इतिहास का पुनरुद्धार

    प्रस्ताव के अनुसार, क्षेत्र के प्रत्येक ऐतिहासिक मंदिर परिसर में एक सुसज्जित इतिहास दीर्घा स्थापित की जाएगी, जहां उस तीर्थ विशेष की पौराणिक गाथा, सांस्कृतिक महत्व और ऐतिहासिक संदर्भों को सुंदर चित्रों तथा शिलालेखों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाली युवा पीढ़ियों को अपनी समृद्ध और गौरवशाली सभ्यता को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ के साथ-साथ प्रति सप्ताह प्रबुद्ध संतों, विचारकों और वरिष्ठ नागरिकों के माध्यम से श्रीमद्भागवत गीता के व्यावहारिक संदेशों, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन पर सारगर्भित व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में सकारात्मक सोच, वैचारिक शुद्धता और मानसिक शांति का माहौल निर्मित हो सके।

    महिला सशक्तीकरण और सामाजिक विवादों का समाधान

    ग्रामीण अंचलों में महिलाओं की भजन मंडलियों को मंदिर परिसरों के माध्यम से अधिक संगठित और प्रोत्साहित किया जाएगा। धार्मिक कीर्तन के उपरांत मंदिर के पवित्र प्रांगण में एकत्र होकर महिलाएं बाल शिक्षा, परिवार कल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण और समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रचनात्मक विचार-विमर्श करेंगी। इसके साथ ही, ग्रामीणों के आपसी छोटे-मोटे पारिवारिक या भूमि संबंधी विवादों को पुलिस और अदालतों तक ले जाने के बजाय मंदिर की पावन मर्यादा के बीच गांव के सेवानिवृत्त सम्मानित नागरिकों और प्रबुद्ध महिलाओं के सहयोग से मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे ग्रामीणों के कीमती समय और धन की बचत होगी तथा आपसी प्रेम बना रहेगा।

    युवा ऊर्जा का सही दिशा में नियोजन और रोजगार सृजन

    युवाओं को नशे की लत और डिजिटल व्यस्तता से दूर रखकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से 48 कोस के प्रमुख ग्रामीण मंदिरों की उपलब्ध भूमि पर पारंपरिक अखाड़ों और आधुनिक व्यायामशालाओं का निर्माण किया जाएगा। मंदिर के वार्षिक उत्सवों के अवसर पर राज्य स्तरीय कुश्ती दंगल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे पारंपरिक ग्रामीण खेलों को नया जीवन मिलेगा। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर 'कुरुक्षेत्र प्रसादम' के रूप में भुने चने के पोषक लड्डुओं के निर्माण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here