खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर और मुख्यालय स्थानांतरण को लेकर विवाद तेज है। विधायक दीपचंद खेरिया विरोध में सक्रिय, वहीं किशनगढ़ बास को संभावित मुख्यालय बनाने की चर्चा भी गर्म।
खैरथल-तिजारा जिले के नाम और मुख्यालय विवाद में किशनगढ़ बास की चर्चा, विधायक खेरिया विरोध में सक्रिय
मिशनसच न्यूज, किशनगढ़ बास। खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर “भर्तृहरि नगर” किए जाने और मुख्यालय स्थानांतरण की संभावना को लेकर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधायक दीपचंद खेरिया ने साफ कहा है कि सरकार उनका नाम तो बदल नहीं सकती और न ही उन्हें खैरथल की जनता से दूर कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि जब भी इस जिले का जिक्र होगा, लोग उन्हें जिले के निर्माता के रूप में याद करेंगे।
भर्तृहरि नगर नाम की घोषणा के बाद से ही जिले के राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। विधायक खेरिया ने इसे जनता के अपमान और पहचान छीनने का प्रयास बताया है। वह लगातार खैरथल में बैठकों और रणनीतियों के जरिए लोगों को साथ ले रहे हैं और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं।
किशनगढ़ बास को मुख्यालय बनाने की चर्चा
इस विवाद के बीच किशनगढ़ बास का नाम भी चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही भौगोलिक दृष्टि से मुख्यालय का निर्णय लिया जाता और किशनगढ़ बास को जिला मुख्यालय बनाया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
किशनगढ़ बास जिले के सबसे पुराने और प्रभावशाली उपखंडों में से एक है। जिले में कुल पांच उपखंड हैं – किशनगढ़ बास, मुंडावर, तिजारा, टपूकड़ा और कोटकासिम। इनमें किशनगढ़ बास सबसे पुराना है और प्रशासनिक दृष्टि से भी सबसे सशक्त माना जाता है।
भौगोलिक स्थिति और सुविधाएं
भौगोलिक रूप से किशनगढ़ बास से सभी उपखंडों की दूरी संतुलित है – मुंडावर 25 किलोमीटर, कोटकासिम 20 किलोमीटर, तिजारा 18 किलोमीटर और टपूकड़ा 40 किलोमीटर।
यहां वर्षों से प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाएं मौजूद हैं। अलवर जिले में, अलवर शहर के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर सबसे ज्यादा सरकारी कार्यालय और न्यायिक संस्थान यहीं स्थापित हुए हैं। अधिकारियों के लिए विद्युत विभाग का विश्रांति भवन, काले खां बाग में आवासीय क्वार्टर, और अन्य सुविधाएं लंबे समय से मौजूद हैं।
जिला न्यायालय और अधूरी परियोजनाएं
हाल ही में जिला मुख्यालय खैरथल पर न्यायालय खोलने के आदेश हुए, लेकिन उपयुक्त भवन न मिलने के कारण न्यायालय किशनगढ़ बास न्यायालय परिसर में शुरू किया गया। यहां के बंबोरा गांव में करोड़ों की लागत से मिनी सचिवालय जैसे दो मंजिला सद्भावना मंडप का निर्माण भी वर्षों पहले हो चुका है, जो अब तक उपयोग में नहीं लाया गया।
सद्भावना मंडप के अलावा, आईटीआई और छात्रावास जैसी सुविधाएं भी यहां संचालित हैं। काले खां बाग के पास सामुदायिक अस्पताल का भवन बालिका महाविद्यालय के रूप में उपयोग हो रहा है, जिसका नया भवन तैयार है और जल्द स्थानांतरण संभव है।
स्थानीय राजनीति में चुप्पी और अटकलें
किशनगढ़ बास को मुख्यालय बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन अब जिले के नाम और मुख्यालय को लेकर चल रही गरमाहट में यहां के लोगों की चुप्पी अलग-अलग मायनों में देखी जा रही है। कुछ इसे “सही मौके का इंतजार” बता रहे हैं, तो कुछ “राजनीतिक गणित” मान रहे हैं।
फिलहाल स्थिति
भर्तृहरि नगर नामकरण और मुख्यालय परिवर्तन पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन इस मुद्दे ने स्थानीय राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है। खेरिया के विरोध और किशनगढ़ बास की चर्चा के चलते यह विवाद आने वाले समय में और भी बड़ा रूप ले सकता है।


