गंगापुर सिटी PG कॉलेज में वरिष्ठता की अनदेखी पर प्रो. रमेश बैरवा ने कॉलेज शिक्षा आयुक्त को परिवेदन दिया। संशोधित आदेश जारी कर चार्ज देने की मांग।
मिशनसच न्यूज, गंगापुर सिटी। राजकीय पीजी महाविद्यालय गंगापुर सिटी में प्राचार्य पद के अतिरिक्त चार्ज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो. रमेश बैरवा ने कॉलेज शिक्षा आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश बैरवा से मिलकर एक विस्तृत परिवेदन प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही प्रतिलिपि अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को भी भेजी गई है। उन्होंने मांग की है कि वरिष्ठता के आधार पर उन्हें ही महाविद्यालय का प्रभार सौंपा जाए और 20 नवंबर 2025 को जारी किए गए आदेश को संशोधित किया जाए।
प्रो. बैरवा का कहना है कि प्राचार्य प्रो. सुमित्रा मीणा को एपीओ किए जाने के बाद, 19 नवंबर 2025 से महाविद्यालय का चार्ज उन्हें सौंपा गया था, क्योंकि वे कॉलेज के सबसे वरिष्ठ संकाय सदस्य हैं। उन्होंने चार्ज ग्रहण करने के बाद विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया तथा नियमित कक्षाओं का माहौल बनाया। विद्यार्थियों ने भी इस पहल की सराहना की।
लेकिन, इसके अगले ही दिन यानी 20 नवंबर 2025 को शाम कार्यालय समय समाप्त होने के बाद, कॉलेज शिक्षा संयुक्त निदेशक (HRD) द्वारा राजकीय पीजी कॉलेज के अतिरिक्त प्रभार हेतु प्रो. बी.एल. मेनावत के नाम आदेश जारी कर दिए गए। प्रो. बैरवा ने इसे नियमविरुद्ध, मनमाना और वरिष्ठता की खुली अनदेखी बताया है।
परिवेदन में प्रो. बैरवा ने स्पष्ट किया कि प्रो. बनवारीलाल मेनावत वर्तमान में राजकीय कन्या महाविद्यालय गंगापुर सिटी में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पदस्थापना अभी भी PG कॉलेज में ‘आचार्य’ के पद पर ही है। प्राचार्य के रूप में उनकी नियुक्ति नहीं है। इसके अलावा वे प्रो. बैरवा से काफी जूनियर हैं। कॉलेज सेवा में प्रो. बैरवा का चयन वर्ष 1995 में हुआ था, जबकि प्रो. मेनावत 1998 में चयनित हुए थे।
प्रो. बैरवा ने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में जारी वरीयता सूची में उनका स्थान 159 था, जबकि प्रो. मेनावत 1506 नंबर पर थे। इस प्रकार वरिष्ठता क्रम में प्रो. मेनावत उनसे 1347 स्थान नीचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथ्यों की अनदेखी कर संयुक्त निदेशक द्वारा जारी आदेश पूर्णतः असंगत और मनमाना है।
उन्होंने परिवेदन में भावनात्मक पीड़ा का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि वरिष्ठता की अनदेखी से उन्हें मानसिक और सामाजिक दोनों रूप से ठेस पहुंची है। उनके अनुसार, “यह पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है। महाविद्यालय के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में भी प्रो. मेनावत द्वारा जानबूझकर मेरा नाम नहीं जोड़ा गया।” उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव बताते हुए कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ है। प्रो. बैरवा का आरोप है कि यह संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने 20 नवंबर की रात्रि की घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें प्रो. मेनावत रात करीब 8 बजे कथित रूप से बिना अनुमित महाविद्यालय में प्रवेश कर गए। उनके साथ वजीरपुर कॉलेज के नोडल अधिकारी संस्कृत आचार्य रामकेश मीना, राजनीति विज्ञान के सहायक आचार्य धर्मवीर मीना और अन्य लोग भी मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी राधेश्याम गुर्जर—जो हृदय रोगी हैं—पर दबाव बनाकर डिस्पैच रजिस्टर और अन्य दस्तावेज लिए। संविदाकर्मी विजय गुप्ता से जबरन पत्र टाइप करवाए गए और कुछ दस्तावेज फाड़े गए।
प्रो. बैरवा ने कहा कि यह सब महाविद्यालय के प्राचार्य कक्ष तक पहुंचकर किया गया, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन तथा आपराधिक कृत्य है। घटना रात 10 बजे तक चली। प्रो. बैरवा का कहना है कि आयुक्तालय के आदेश न तो उन्हें भेजे गए और न ही व्हाट्सएप पर साझा किए गए। उन्होंने पूरे प्रकरण की सूचना आयुक्त कॉलेज शिक्षा, संयुक्त निदेशक और पुलिस को दे दी है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में कोई अप्रिय घटना हो जाती तो कार्यवाहक प्राचार्य होने के कारण जिम्मेदारी उन पर आ जाती।
प्रो. बैरवा ने मांग की है कि वरिष्ठता के आधार पर उन्हें ही महाविद्यालय का चार्ज सौंपा जाए और विवादित आदेश को तुरंत संशोधित किया जाए।
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