वाणिज्य मंत्री से इस्तीफे की मांग, देशभर में आंदोलन की चेतावनी; समझौता रद्द करने को लेकर संगठनों की एकजुटता की अपील, एसकेएम ने सरकार पर आत्मसमर्पण का आरोप
जयपुर। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) राजस्थान ने अमेरिका-भारत अंतरिम व्यापार समझौते के प्रस्तावित ढांचे को भारतीय कृषि, डेयरी और किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगाया है। संगठन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने की कड़ी चेतावनी दी है।
एसकेएम ने कहा कि भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी विवरण के अनुसार भारत अमेरिका के औद्योगिक सामानों और खाद्य व कृषि उत्पादों की बड़ी श्रृंखला पर टैरिफ खत्म या कम करने जा रहा है। इनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे व प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब व अन्य उत्पाद शामिल हैं। संगठन का आरोप है कि इससे भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी और विदेशी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ेगा।
मोर्चा ने कहा कि वाणिज्य मंत्री द्वारा पहले यह दावा किया गया था कि कृषि और डेयरी क्षेत्र मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर रहेंगे, लेकिन वर्तमान ढांचा उनके दावों का खंडन करता है। एसकेएम ने इसे किसानों और देश के साथ विश्वासघात बताते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
संगठन के अनुसार अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाया गया है, जबकि भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क घटा या समाप्त कर रहा है। इससे भारतीय बाजार में सस्ते आयात बढ़ेंगे और स्थानीय उत्पादन प्रभावित होगा। पशु आहार, मक्का, सोयाबीन, कपास, गेहूं और डेयरी उत्पादों के आयात से घरेलू किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
एसकेएम ने आरोप लगाया कि गैर-शुल्क बाधाओं में ढील से दूध व डेयरी उत्पादों का आयात भी आसान होगा। जीएम खाद्य पदार्थों और बीजों के आयात से कृषि भूमि की उर्वरता और पारंपरिक खेती पर खतरा मंडराएगा। सेब, अनानास, नारियल और काजू जैसे उत्पादों के आयात से पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को नुकसान होगा।
मोर्चा ने कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात में न्यूनतम समर्थन मूल्य, बढ़ती लागत, खाद-बीज के दाम और कर्ज के बोझ से किसान पहले ही परेशान हैं। ऐसे में सस्ते आयात भारतीय कृषि व्यवस्था को और कमजोर कर देंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी राजनीतिक दलों, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और जन आंदोलनों से एकजुट होकर इस नीति का विरोध करने की अपील की है। साथ ही 12 फरवरी 2026 को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन और आम हड़ताल में बड़ी संख्या में भागीदारी का आह्वान किया गया है।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए तो देशव्यापी व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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