नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध दी गई हालिया टिप्पणी ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। चेन्नई में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान खरगे ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) और भाजपा के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री के लिए 'आतंकवादी' जैसे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती, इसलिए उनके साथ जुड़ना लोकतंत्र के लिए घातक है।
भाजपा ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री पर इस तरह के तीखे प्रहार किए हों।
कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों का इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में दिए गए प्रमुख विवादित बयानों का विवरण इस प्रकार है:
| नेता | विवादित टिप्पणी | वर्ष/अवसर | संदर्भ |
| मल्लिकार्जुन खरगे | "रावण" | 2022 (गुजरात चुनाव) | खरगे ने सवाल किया था कि क्या पीएम के रावण की तरह 100 सिर हैं, जो वे हर चुनाव में दिखते हैं। |
| मल्लिकार्जुन खरगे | "जहरीला सांप" | 2023 (कर्नाटक चुनाव) | बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका आशय व्यक्ति नहीं, बल्कि विचारधारा से था। |
| राहुल गांधी | "सभी चोरों का सरनेम मोदी…" | 2019 (लोकसभा चुनाव) | इस बयान पर काफी कानूनी विवाद हुआ और मानहानि का मुकदमा भी चला। |
| सोनिया गांधी | "मौत का सौदागर" | 2007 (गुजरात चुनाव) | यह टिप्पणी 2002 के गुजरात दंगों के संदर्भ में की गई थी, जिसने काफी तूल पकड़ा था। |
चेन्नई में दिए गए खरगे के इस ताज़ा बयान को भाजपा ने राष्ट्र के प्रधान का अपमान बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से चुनाव के समय अक्सर ध्रुवीकरण बढ़ जाता है, जैसा कि पूर्व में 'रावण' और 'मौत का सौदागर' वाली टिप्पणियों के समय देखा गया था।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस विकास के मुद्दों पर लड़ने के बजाय व्यक्तिगत हमलों पर उतर आई है, जो उनके गिरते राजनीतिक स्तर को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस का पक्ष है कि वे भाजपा की नीतियों और उनके कार्य करने के तरीके की आलोचना कर रहे हैं।


