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    यूपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ी कार्रवाई, 17 डॉक्टरों पर विभागीय जांच

    लखनऊ: स्वास्थ्य विभाग में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक; ड्यूटी से गायब रहने वाले 5 डॉक्टर बर्खास्त, कई अफसरों पर गिजी गाज

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने विभाग में लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से ड्यूटी से नदारद रहने और कार्य में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में प्रदेश के 5 चिकित्साधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में कई अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरी है।

    इन 5 डॉक्टरों की हुई बर्खास्तगी

    लगातार अनुपस्थित रहने और चिकित्सकीय दायित्वों का निर्वहन न करने पर इन डॉक्टरों को सेवा से बाहर कर दिया गया है:

    1. डॉ. अलकनन्दा (गोरखपुर)

    2. डॉ. रामजी भारद्वाज (कुशीनगर)

    3. डॉ. सौरभ सिंह (बलरामपुर)

    4. डॉ. विकलेश कुमार शर्मा (अमेठी)

    5. डॉ. मोनिका वर्मा (औरैया)

    अंबेडकर नगर के CMO और डिप्टी CMO पर कार्रवाई

    निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में अनियमितता बरतने के मामले में अंबेडकर नगर के सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर पद के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध हुए हैं। एडीएम स्तर की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    लापरवाही पर यहाँ भी हुई कार्रवाई

    • हरदोई: अवैध अस्पतालों पर लगाम न लगाने के आरोप में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश।

    • प्रयागराज: मेजा सीएचसी अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर प्रशासनिक ढिलाई के चलते कार्रवाई और तबादले का निर्देश।

    • सुल्तानपुर: लम्भुआ सीएचसी में महिला मरीज के उपचार में लापरवाही पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह सहित तीन पर विभागीय गाज गिरी।

    • मथुरा: जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों द्वारा गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट तैयार करने के गंभीर मामले में भी जांच बैठा दी गई है।

    "मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं"

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों के इलाज में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कदम उठाए जाएं ताकि व्यवस्था में शुचिता बनी रहे। कई अन्य डॉक्टरों की वेतनवृद्धि रोकने और परिनिंदा दंड देने के भी आदेश जारी किए गए हैं।

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