More
    Homeराज्यबिहारसरकारी आदेश बेअसर! BAU में ईमेल के जरिए नियुक्तियों पर करोड़ों के...

    सरकारी आदेश बेअसर! BAU में ईमेल के जरिए नियुक्तियों पर करोड़ों के खेल का आरोप

    भागलपुर: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई कृषि अनुसंधान नहीं बल्कि गैर-शैक्षणिक पदों पर हुई नियुक्तियों में सामने आया बड़ा विवाद है। विश्वविद्यालय में निदेशक, सहायक कुलसचिव और प्रशाखा पदाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर हुई बहाली में धांधली, भ्रष्टाचार और सरकारी नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं।

    सरकारी पाबंदी को दरकिनार कर बांटे गए नियुक्ति पत्र

    मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि बिहार सरकार द्वारा नियुक्तियों पर लगाई गई रोक के बावजूद बहाली प्रक्रिया जारी रही। आरोप है कि सरकार ने अगस्त 2024 और मार्च 2025 में इस प्रक्रिया पर रोक की पुष्टि की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने जून 2025 में गुपचुप तरीके से कॉल लेटर जारी कर दिए। पारदर्शिता का आलम यह रहा कि चयनित अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ई-मेल के जरिए नियुक्ति पत्र भेजे गए।

    चयन प्रक्रिया में भारी हेरफेर और 'अपारदर्शिता' का आरोप

    शिकायतकर्ताओं का दावा है कि फरवरी 2024 में विज्ञापन जारी होने के समय से ही अनियमितताएं शुरू हो गई थीं। पात्र और अपात्र उम्मीदवारों की सूची में मनमाने ढंग से बदलाव किए गए। समान योग्यता और 'रिमार्क्स' होने के बावजूद उम्मीदवारों के साथ दोहरा व्यवहार किया गया। विवाद बढ़ने पर प्रशासन ने सूची से 'रिमार्क्स' का कॉलम ही हटा दिया, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। साथ ही, श्रेणीवार रिक्तियों में अंतिम समय पर बदलाव कर योग्य उम्मीदवारों को बाहर करने का भी आरोप है।

    करोड़ों का कथित लेन-देन और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप

    पूरे प्रकरण में न केवल प्रशासनिक चूक, बल्कि भारी आर्थिक भ्रष्टाचार की बात भी सामने आ रही है। शिकायतकर्ता ने इसे 'संगठित भ्रष्टाचार' करार देते हुए आरोप लगाया है कि नियुक्तियों के बदले मोटी रकम का लेन-देन हुआ है। इस मामले में वर्तमान कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की गई है। साथ ही, वाराणसी में कुछ संदिग्ध निवेशों की स्वतंत्र जांच कराने के लिए राजभवन और कृषि मंत्री को पत्र लिखा गया है।

    CAG की रिपोर्ट ने भी खोली नियुक्तियों की पोल

    नियुक्ति प्रक्रिया की सत्यता पर महालेखाकार (CAG), पटना की ऑडिट रिपोर्ट ने भी मुहर लगाई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई चयनित उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके अलावा, रोस्टर प्रणाली का उल्लंघन, विज्ञापन के बाद वेतन स्तर में बदलाव और कृषि विभाग की अनुमति के बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जैसी कई गंभीर त्रुटियां उजागर हुई हैं। अब यह मामला पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसमें उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here