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    HomeराजनीतिManoj Jha का प्रधानमंत्री Narendra Modi पर बड़ा हमला

    Manoj Jha का प्रधानमंत्री Narendra Modi पर बड़ा हमला

    नई दिल्ली| देश के राजनीतिक मंच पर इन दिनों जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई अपीलों ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक और अवसर दे दिया है। सोमवार (11 मई, 2026) को प्रधानमंत्री ने जनता से एक वर्ष तक सोना न खरीदने जैसे जो सुझाव साझा किए, उसके बाद से ही विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।

    मनोज झा का तीखा प्रहार

    राजद (RJD) सांसद मनोज झा ने प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश को मजबूत नेतृत्व की दरकार थी, तब सरकार चुनावी रैलियों और प्रचार में व्यस्त थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संकट के समय जनता को 'पैनिक न करने' की सलाह दी जा रही थी, जबकि दूसरी ओर चुनाव प्रचार में हजारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए। झा ने अखबारों के पन्नों पर छपने वाले महंगे विज्ञापनों का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर यह जनता का पैसा किसकी अनुमति से इस तरह खर्च किया जा रहा है? उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों से भागने के बजाय यह स्वीकार करें कि सरकार से चूक हुई है।

    कांग्रेस ने साधा निशाना

    बिहार कांग्रेस के नेता राजेश राठौर ने भी प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो जनता से तो सब कुछ मांगते हैं, लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं देते। राठौर ने पुराने फैसलों की याद दिलाते हुए कहा:

    • नोटबंदी: जनता की गाढ़ी कमाई बैंकों में जमा करा दी गई, जिससे आम आदमी को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

    • कोरोना काल: बीमारी के इलाज के ठोस इंतजाम करने के बजाय ताली-थाली बजवाने और दीये जलवाने जैसे आयोजनों में समय व्यतीत किया गया।

    आर्थिक नीतियों पर सवाल

    प्रधानमंत्री की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने सोना न खरीदने और तेल के कुएं न होने का हवाला देते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की बात कही है, उस पर भी कांग्रेस ने कड़ा पलटवार किया है। राजेश राठौर ने कटाक्ष किया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था में विनाश का ऐसा गड्ढा खोद दिया है कि अब किसी भी सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही।

    विपक्ष का यह हमला साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपीलों पर राजनीतिक घमासान और अधिक बढ़ने वाला है।

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