जयपुर में सूक्ष्म लेखन कला देखकर मुनि श्री ने सराही साधना और प्रतिभा
जयपुर। संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि 108 विनम्र सागर महाराज गुरुवार प्रातः सूर्य नगर स्थित तारों की कूट पर “संतोष विला” पहुंचे, जहां छाबड़ा परिवार द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि वरिष्ठ पत्रकार एवं चूलगिरी अतिशय क्षेत्र के संरक्षक प्रवीण चंद्र छाबड़ा ने मुनि श्री को अपनी तीन पुस्तकें भेंट कीं। इस दौरान विश्व प्रसिद्ध चावल पर सूक्ष्म लेखन कलाकार नीरू छाबड़ा ने मुनि श्री को चावल पर लेखन की अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन किया।
मुनि विनम्र सागर महाराज ने नीरू छाबड़ा द्वारा तैयार की गई भक्तामर स्तोत्र, “अनेकता में एकता मेरा भारत महान” तथा गणेश जी के 108 नामों की सूक्ष्म कलाकृतियों का अवलोकन किया। वहीं सारांश जैन (छाबड़ा) ने हस्तनिर्मित कागज पर सूक्ष्म लेखन से तैयार “संपूर्ण गीता” की विशेष कृति भी मुनि श्री को दिखाई।
कलाकृतियों को देखकर मुनि श्री ने अपनी पंजिका पुस्तिका में लिखा— “पुरुषार्थ और प्रभु कृपा का अद्भुत मेल देख रहा हूं। साधना कहां-कहां से क्या-क्या बोलती है, कितना अच्छा और पवित्र बोलती है। संवेदना के साथ मोक्षगामी भव, गुरुदेव श्री का आशीर्वाद।”
इस अवसर पर प्रदीप छाबड़ा, सारांश छाबड़ा, अभिनव छाबड़ा एवं दिव्यम छाबड़ा ने मुनि श्री के पाद पक्षालन कर पुण्यार्जन प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का माहौल रहा
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