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    दो घंटे कोर्ट रूम में रहे भाजपा विधायक, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई

    जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति को फोन करने के मामले में भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय पाठक गुरुवार को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जिसके बाद इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए भविष्य की तिथि निर्धारित कर दी गई है।

    न्यायपालिका की गरिमा और विधायक की उपस्थिति

    जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के सामने विधायक संजय पाठक को अनिवार्य रूप से उपस्थित होना पड़ा। इससे पूर्व हुई सुनवाई में विधायक ने व्यक्तिगत पेशी से छूट देने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया था। गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे कोर्ट पहुंचे विधायक शाम पांच बजे तक कार्यवाही का हिस्सा रहे। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को भी न्यायिक सहायता प्रदान करने की अनुमति दी है, जिससे अब इस प्रकरण में नए तथ्यों के जुड़ने की संभावना बढ़ गई है।

    अनजाने में कॉल लगने का तर्क और अदालती रुख

    विधायक संजय पाठक ने उच्च न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में यह दलील दी है कि न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा का नंबर उनसे मानवीय भूलवश डायल हो गया था। उनके अनुसार जैसे ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया था और उनकी मंशा किसी भी तरह से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की नहीं थी। हालांकि, माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था कि इस प्रकार के स्पष्टीकरण और हलफनामे पर विधायक की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना विचार करना संभव नहीं है, क्योंकि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका के सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है।

    विवाद की जड़ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    इस पूरे मामले की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी जब न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने खुली अदालत में इस बात का खुलासा किया था कि एक मौजूदा विधायक ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की है। उस समय उनके समक्ष विधायक के परिवार से संबंधित खनन मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई चल रही थी। निष्पक्षता के सिद्धांत का पालन करते हुए न्यायमूर्ति ने स्वयं को उस केस से अलग कर लिया था, जिसके बाद कटनी के आशुतोष मनु दीक्षित ने इस विषय पर याचिका दायर की। अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना का मामला माना था और विधायक को नोटिस जारी किया था।

    आगामी सुनवाई और भविष्य की कार्यवाही

    अदालत ने अब इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की है, जिस दिन दोपहर ढाई बजे पुन: चर्चा शुरू होगी। न्यायिक गलियारों में इस मामले को अत्यंत गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर जजों की कार्यप्रणाली में बाहरी हस्तक्षेप के प्रयासों से संबंधित है। 15 जुलाई को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि विधायक द्वारा दी गई 'गलती से कॉल' वाली दलील को अदालत स्वीकार करती है या अवमानना की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाता है। फिलहाल विधायक को अगली तारीख तक का समय मिल गया है लेकिन न्यायिक जांच का शिकंजा उन पर कसता नजर आ रहा है।

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