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    अंबिकापुर निगम की सफाई व्यवस्था ठप, भुगतान विवाद में घिरी स्वच्छता प्रभारी की पत्नी

    अंबिकापुर | नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 48 में से 24 वार्डों में ठेका प्रणाली के तहत चलने वाली स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। बीते 19 महीनों से नगर निगम प्रशासन द्वारा सफाई ठेकेदारों के बकाए बिलों का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण ठेकेदार अब सफाई कामगारों को मानदेय (सैलरी) देने की स्थिति में नहीं हैं। अपनी मजदूरी न मिलने से नाराज होकर सफाई कर्मियों ने काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुन लिया है। इस हड़ताल की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में कचरा संग्रहण और साफ-सफाई का काम ठप पड़ गया है, जिससे शहर के कई रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर नजर आने लगे हैं।

    स्वच्छता प्रभारी के पति को मिला विशेष लाभ, ₹90 लाख का भुगतान

    इस पूरे संकट के बीच नगर निगम के पार्षद और पूर्व एमआईसी (MIC) सदस्य मेराज गुड्डू ने निगम प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुख्ता प्रमाणों के साथ यह दावा किया है कि फंड की कमी का बहाना बनाने वाले नगर निगम ने ठेकेदारों को भुगतान करने में भारी भेदभाव किया है। मेराज गुड्डू का कहना है कि नगर निगम की एमआईसी सदस्य और स्वच्छता विभाग की प्रभारी ममता तिवारी के पति, जो खुद एक सफाई ठेकेदार हैं, उन्हें 5 जनवरी 2026 को उनके काम के बदले करीब 90 लाख रुपये की पूरी राशि जारी कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सभी ठेकेदारों के बिलों की फाइलें एक साथ आगे बढ़ाई गई थीं, लेकिन राहत सिर्फ एक को ही मिली।

    राजनीतिक रसूख का आरोप, अन्य ठेकेदारों की बढ़ी अनदेखी

    पार्षद मेराज गुड्डू ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपने राजनैतिक रसूख और पद के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके सिर्फ एक चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया है, जबकि पिछले पौने दो साल से अपने पैसों के लिए भटक रहे अन्य ठेकेदारों की जायज मांग को पूरी तरह दबा दिया गया। उन्होंने इसे नगर निगम के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का एक बड़ा प्रमाण बताया है। उन्होंने निगम कमिश्नर और प्रशासन से मांग की है कि सभी छोटे-बड़े ठेकेदारों का रुका हुआ पैसा तुरंत रिलीज किया जाए ताकि शहर की सफाई व्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट सके। इसके साथ ही उन्होंने इस पक्षपातपूर्ण रवैये की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का निपटारा नहीं हुआ, तो वे जनता के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।

    आम जनता में भारी आक्रोश, कलेक्टर तक पहुंची शिकायत

    सफाई व्यवस्था के इस तरह अचानक ठप हो जाने से अंबिकापुर के आम नागरिकों में नगर निगम के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि भीषण गर्मी के इस मौसम में लंबे समय तक गंदगी का यही आलम रहा, तो शहर में संक्रामक बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा, जो जनस्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर उन्हें इस पूरे मामले का ज्ञापन सौंपा है और नगर निगम के भेदभावपूर्ण रवैये की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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