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    Homeकृषिग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को किसान महापंचायत ने बताया जनविरोधी, किसानों ने जताया विरोध

    ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को किसान महापंचायत ने बताया जनविरोधी, किसानों ने जताया विरोध

    ग्रीनफील्ड परियोजना के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, खेती और ग्रामीण जीवन पर खतरे का जताया अंदेशा

    जयपुर। किशनगढ़ से कोटपूतली तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान महापंचायत ने रविवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए इसे जनसामान्य के लिए अनुपयोगी और किसान विरोधी परियोजना बताया। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे गांवों की संपर्क व्यवस्था, सामाजिक संरचना और खेती-किसानी को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

    जुलूस के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए रामपाल जाट ने कहा कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने से गांव दो हिस्सों में बंट जाएंगे, जिससे भाईचारा, सामाजिक संस्कृति और आपसी संपर्क व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी ही कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए 8 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस मार्ग पर साइकिल, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी जैसे पारंपरिक ग्रामीण वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा, जिससे ग्रामीण जीवन और खेती दोनों प्रभावित होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि परियोजना के आसपास स्थानीय लोगों को किसी प्रकार के व्यवसाय की अनुमति भी नहीं मिलेगी।

    रामपाल जाट ने कहा कि यह परियोजना केवल कुछ चुनिंदा व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जबकि इसके लिए करीब 6500 बीघा सिंचित एवं दो फसली कृषि भूमि अधिग्रहित की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि खेजड़ी सहित बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।

    सभा को किसान महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, महामंत्री जगदीश नारायण खुडियाला, मंत्री ज्ञानचंद मीणा, बत्ती लाल बैरवा, अजमेर जिला अध्यक्ष प्रहलाद खुरडिया, उपाध्यक्ष चतुर्भुज चौधरी, हरदयाल तिलोनिया, कोटपूतली तहसील अध्यक्ष हरसहाय तवर एवं किशनगढ़ तहसील अध्यक्ष मोहन चौधरी सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे” के नारे लगाए और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को निरस्त करने की मांग को लेकर उपखंड कार्यालय पहुंचकर आपत्तियां दर्ज कराईं।

    इस आंदोलन में ग्राम तोलामाल, नयागांव, तिलोनिया और नडू गांव सहित कई क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से दयाल गुर्जर, भंवर लाल गुर्जर, बद्रीलाल बैरवा, किशनलाल ओला, श्रवण गुर्जर, सूरजमल गुर्जर, महावीर बाना, हजारी बैरवा, मांगीलाल जाट, रामदयाल डेरीवाला, गोपाल शर्मा, हरिराम गुर्जर एवं हरजीराम गुर्जर सहित अनेक किसान मौजूद रहे।

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