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    सादगी, मिलनसारी और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए याद किए जाएंगे अफसर यू अहमद

    लखनऊ । जनपद संत कबीर नगर के मेहदावल विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अफ़सर यू अहमद को आज जनपद संत कबीर नगर के सेमरियावां बाज़ार स्थित कब्रिस्तान में इस्लामिक रस्मो-रिवाज़ के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में प्रदेश एवं विभिन्न जनपदों से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, शुभचिंतकों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर नम आँखों से अंतिम विदाई दी। पूरे क्षेत्र में शोक और ग़म का माहौल दिखाई दिया।अफ़सर यू अहमद का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति और युवाओं के बीच सक्रिय सामाजिक कार्यों से प्रारंभ हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की थी। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक चेतना, नेतृत्व क्षमता और प्रभावशाली संवाद शैली के लिए पहचाने जाते थे। विश्वविद्यालय के दौरान वे कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई में सक्रिय रहे तथा उस दौर में वरिष्ठ नेताओं ममता बनर्जी और गुलाम नबी आजाद के साथ जनरल सेक्रेट्री के पद पर संगठनात्मक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश में यूथ कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय योगदान देते हुए तत्कालीन प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संगठन को मजबूत करने का कार्य किया। वह दौर उत्तर प्रदेश में यूथ कांग्रेस के उभार और युवाओं की राजनीति का स्वर्णिम दौर माना जाता है। उसी समय डॉ. निर्मल खत्री पहली बार भारी मतों से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए थे।
    सन 1984 के लोकसभा चुनाव अभियान में अफ़सर यू अहमद ने स्वर्गीय नसीब पठान, स्वर्गीय फैजल मसूद तथा न्याय योद्धा अयाज़ खान अच्छू सहित अनेक साथियों के साथ दिन-रात मेहनत कर प्रचार अभियान और संगठन को मजबूती प्रदान की थी। चुनावी दौर में ये सभी साथी लंबे समय तक एक साथ रहकर रणनीतिक बैठकों, जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं के समन्वय का कार्य करते थे।न्याय योद्धा अयाज़ खान अच्छू ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अफ़सर यू अहमद से उनकी पहली मुलाक़ात उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय कैसरबाग में हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस का मुख्यालय कैसरबाग में हुआ करता था। बस अड्डे के समीप होने के कारण यह प्रदेश भर से आने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक जीवंत राजनीतिक केंद्र था, जहाँ कार्यकर्ताओं का लगातार आना-जाना लगा रहता था।
    अयाज़ खान अच्छू ने कहा कि पहली ही मुलाक़ात में अफसर यू अहमद साहब की सादगी, मिलनसारी, आत्मीय व्यवहार और मधुर संवाद शैली ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था। वे न केवल बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता भी थे। अपने भाषणों और संवाद शैली से वे कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते थे। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान उन्हें सबसे अलग पहचान देता था।
    उन्होंने बताया कि विधायक बनने के बाद भी अफसर यू अहमद साहब का पुराने साथियों और कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव बना रहा। लखनऊ स्थित ओ.सी.आर. विधायक निवास में उनके तथा स्वर्गीय फजले मसूद के कमरे आवंटित थे, जहाँ अक्सर संगठनात्मक बैठकों, राजनीतिक चर्चाओं और कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन का सिलसिला चलता रहता था। उस समय अयाज़ खान अच्छू अल्पसंख्यक सेल में प्रदेश महामंत्री के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। दोनों के बीच राजनीतिक संबंधों के साथ पारिवारिक आत्मीयता भी थी, क्योंकि अफसर यू अहमद उनके दूर के रिश्तेदारों में भी थे।अयाज़ खान अच्छू ने भावुक होते हुए कहा कि “हमने साथ में हफ्तों दिन-रात संगठन के लिए कार्य किया। संघर्ष, यात्राएँ, बैठकों और चुनावी अभियानों की अनगिनत यादें आज भी मन में ताज़ा हैं। एक-एक करके पुराने कांग्रेस योद्धा साथी हमसे बिछड़ते जा रहे हैं। अफसर यू अहमद साहब का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर अपूरणीय क्षति है।”
    उन्होंने यह भी बताया कि अफ़सर यू अहमद ने ही पहली बार उनकी मुलाक़ात वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद तथा पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह से उनके आवास पर कराई थी, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण स्मृतियों में शामिल बताया।राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों ने कहा कि अफ़सर यू अहमद का जीवन जनसेवा, संघर्ष और जनता के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित रहा। कछार क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में ट्यूबवेल स्थापित हुए, जिससे किसानों को व्यापक लाभ मिला। क्षेत्र की जनता आज भी उनके इन कार्यों को सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करती है।
    वक्ताओं ने कहा कि अफसर यू अहमद हमेशा सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और आम जनता के अधिकारों की आवाज़ बुलंद करते रहे। विधायक बनने के बाद भी उनका व्यवहार सामान्य कार्यकर्ताओं और आम लोगों के प्रति उतना ही आत्मीय बना रहा। यही कारण था कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के बीच एक सरल, मिलनसार और जनप्रिय व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते थे।
    उनकी अंतिम यात्रा में मौजूद लोगों की नम आँखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि क्षेत्र ने केवल एक पूर्व विधायक ही नहीं, बल्कि एक संघर्षशील, वैचारिक, सामाजिक समरसता के पक्षधर और कांग्रेस विचारधारा के प्रति समर्पित जननेता को खो दिया है।ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार और समर्थकों को यह दुख सहन करने की शक्ति दें। उक्त समाचार कवरेज हमारे यूपी स्टेट ब्यूरो प्रमुख शशि भूषण दूबे कंचनीय द्वारा किया गया है।

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