नई दिल्ली। सुबह-सुबह दफ्तर के लिए निकल रहे आशीष के मोबाइल पर जैसे ही एक संदेश चमका, उनके माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। रोजमर्रा की आपाधापी और काम के भारी दबाव के कारण वे अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की किश्त (प्रीमियम) जमा करना पूरी तरह भूल चुके थे, जिसके चलते उनकी पॉलिसी बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। आज के दौर में आशीष अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो इस तरह की उलझन से जूझ रहे हों। वर्तमान समय में अमूमन हर जागरूक नागरिक के पास लाइफ, हेल्थ और गाड़ी को मिलाकर दो या उससे अधिक बीमा पॉलिसियां मौजूद हैं। ऐसे में अलग-अलग दस्तावेजों को सहेजकर रखना, प्रीमियम भुगतान की तारीखें याद रखना और समय पर उनका नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराना एक थकाऊ मानसिक कसरत बन जाता है। इसी बड़ी सिरदर्दी का परमानेंट इलाज करने के लिए अब इंश्योरेंस सेक्टर में एक अत्याधुनिक तकनीकी बदलाव आ रहा है, जिसे 'एकीकृत बीमा समाधान' (इंटीग्रेटेड इंश्योरेंस सॉल्यूशन) का नाम दिया गया है।
एक ही डिजिटल छत के नीचे मिलेंगी वित्तीय सुरक्षा की तमाम सेवाएं
एकीकृत बीमा पॉलिसी का सीधा सा अर्थ यह है कि उपभोक्ता की तमाम तरह की सुरक्षा जरूरतों को अलग-अलग बिखेरने के बजाय एक ही सुव्यवस्थित ढांचे के तहत संभालना। इस नई व्यवस्था में लाइफ इंश्योरेंस, मेडिकल कवर, व्हीकल इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंटल प्रोटेक्शन और होम इंश्योरेंस जैसे तमाम जनरल कवर्स को एक साथ क्लब किया जा सकता है। भारतीय बाजार में अभी पूरी तरह से एक ही दस्तावेज वाली एकल पॉलिसी का दायरा भले ही शुरुआती चरण में हो, लेकिन देश की नामी वित्तीय कंपनियां जैसे एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी इर्गो, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बजाज आलियांज, टाटा एआईए और एसबीआई लाइफ जैसी संस्थाएं अब बंडल्ड या एकीकृत पैकेज की पेशकश करने लगी हैं। इसके जरिए ग्राहक अपनी सभी सक्रिय पॉलिसियों को एक ही एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म या सिंगल रिलेशनशिप मैनेजर के माध्यम से बहुत ही आसानी से ट्रैक और संचालित कर सकते हैं।
केवाईसी के झंझट से मुक्ति और पूरे परिवार को एकमुश्त सुरक्षा का लाभ
इस आधुनिक मॉडल को अपनाने से उपभोक्ताओं को कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलते हैं। सबसे पहला फायदा यह है कि इसमें ग्राहक को अपनी पहचान का सत्यापन (KYC) और पते का विवरण बार-बार हर उत्पाद के लिए अलग से नहीं देना पड़ता, जिससे कागजी औपचारिकताएं न्यूनतम हो जाती हैं। इसके साथ ही, इस फ्रेमवर्क के तहत कोई भी व्यक्ति अपने जीवनसाथी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की सामूहिक वित्तीय सुरक्षा को एक ही जगह बैठकर बेहतर ढंग से प्लान कर सकता है, जिससे परिवार का कोई भी सदस्य अनजाने में कवर होने से नहीं छूटता। जब आपके सारे इंश्योरेंस एक ही डैशबोर्ड पर दिखते हैं, तो आपको यह समझने में भी सहूलियत होती है कि आपके पास कुल कितना लाइफ या हेल्थ कवर मौजूद है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा या कम बीमा पोर्टफोलियो लेने की बड़ी गलती से बच जाते हैं। इसके अतिरिक्त, कई कंपनियां मुख्य प्रीमियम के साथ मुफ्त स्वास्थ्य जांच और रोडसाइड असिस्टेंस जैसी वफादारी योजनाएं भी ऑफर करती हैं। हालांकि, यह स्पष्ट होना चाहिए कि कंबाइंड पॉलिसी लेने मात्र से प्रीमियम की मूल दरें कम नहीं होतीं, क्योंकि प्रीमियम का निर्धारण हमेशा आवेदक की उम्र, सेहत, सम एश्योर्ड और रिस्क फैक्टर के आधार पर ही तय किया जाता है।
पारंपरिक ढर्रे से बिल्कुल जुदा है एकीकृत बीमा मॉडल
यदि पारंपरिक और एकीकृत बीमा व्यवस्था के अंतर को समझें, तो इनके काम करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। जहां पुरानी पारंपरिक व्यवस्था में प्रत्येक जरूरत के लिए अलग कंपनी, अलग लॉगिन आईडी और अलग-अलग कागजी भागदौड़ करनी पड़ती थी, वहीं यह नया एकीकृत मॉडल एक केंद्रीकृत व्यवस्था देता है जहां सभी बीमा कवर एक ही जगह समाहित होते हैं।
इसके अलावा, पारंपरिक व्यवस्था में हर पॉलिसी की तारीख अलग होने से प्रीमियम भूलने और पॉलिसी लैप्स होने का बहुत बड़ा जोखिम रहता था, जबकि नए मॉडल में एक ही मुख्य टाइमलाइन होने से बेहतर ट्रैकिंग संभव है और पॉलिसी टूटने का डर खत्म हो जाता है। दावा निपटान (क्लेम सेटलमेंट) के मामले में भी जहां पहले आपातकाल या बीमारी के समय अलग-अलग कंपनियों के काउंटरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब एक समर्पित रिलेशनशिप मैनेजर या सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए क्लेम पास कराना काफी आसान हो जाता है।
यह नया सिस्टम मुख्य रूप से उन व्यस्त कामकाजी पेशेवरों, बड़े उद्यमियों, उच्च आय वर्ग के लोगों और संयुक्त परिवारों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिनके पास समय की बेहद कमी है। फिर भी, उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल आराम या छूट के लालच में आकर कोई भी फैसला न लें। पॉलिसी साइन करने से पहले प्रत्येक कवर के छिपे हुए नियमों और शर्तों को ध्यान से पढ़ें, कुल बीमित राशि (सम इंश्योर्ड) की पर्याप्तता की जांच करें और संबंधित कंपनी के ग्राहक सेवा रिकॉर्ड को परखने के बाद ही अंतिम निर्णय लें।


