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    जंगल सफारी पर लगा ब्रेक, छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन क्षेत्र पर्यटकों के लिए बंद

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों में आज से सैलानियों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। राज्य के तमाम टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्यों के दरवाजे पर्यटकों के लिए 1 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। इसके बाद आगामी 2 अक्टूबर से वन्यजीव प्रेमियों को एक बार फिर जंगलों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। मानसून के आगमन को देखते हुए देश के कई अन्य हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी हर साल इस अवधि के दौरान पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से थाम दिया जाता है।

    मानसून और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर फैसला

    वन विभाग के मुताबिक, वर्षा ऋतु के दौरान जंगलों के भीतर बने कच्चे रास्ते और सफारी मार्ग बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं, जिससे वाहनों का परिचालन असुरक्षित हो जाता है। इसके अलावा, यह समय वन्य प्राणियों के प्रजनन का भी होता है। ऐसे संवेदनशील समय में वन्यजीवों को एक शांत, प्राकृतिक और सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से ही इंसानी दखलंदाजी और पर्यटन पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जाती है।

    अगले तीन महीनों तक बंद रहेंगे प्रमुख अभयारण्य

    इस निर्णय के लागू होने से प्रदेश के सभी प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में अगले तीन महीनों तक पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। इस बंदी के दौरान वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जंगलों के भीतर केवल संरक्षण, वन्यजीवों की निगरानी और सफारी मार्गों के आवश्यक रखरखाव के कार्यों को अंजाम देंगे। इस दौरान वनों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद किया जाएगा।

    गाइड और स्थानीय कारोबारियों पर पड़ेगा असर

    अचानक जंगलों के बंद होने से सफारी वाहनों के चालकों, स्थानीय गाइडों और अभयारण्यों के आसपास संचालित होने वाले पर्यटन व्यवसायों की गतिविधियां भी कुछ समय के लिए थम जाएंगी। हालांकि, पर्यावरण और वन्यजीवों के संतुलन के लिए इस प्रक्रिया को बेहद जरूरी माना जाता है। अब मानसून का सीजन बीतने और स्थितियां पूरी तरह अनुकूल होने के बाद ही 2 अक्टूबर से लोग दोबारा जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे।

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