More
    Homeदेशतमिलनाडु मामला: CJI की पीठ बोली- आरोप अस्पष्ट और बेबुनियाद

    तमिलनाडु मामला: CJI की पीठ बोली- आरोप अस्पष्ट और बेबुनियाद

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा में हुए विश्वास मत के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस याचिका को पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यों से परे बताया। इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को बताया 'अस्पष्ट'

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका को 'अस्पष्ट और बेबुनियाद आरोपों' पर आधारित बताया। पीठ का कहना था कि याचिकाकर्ता के पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई भी ठोस या विश्वसनीय सबूत (सामग्री) मौजूद नहीं थी, जिसके चलते कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

    क्या था पूरा मामला?

    तमिलनाडु में बीते 13 मई को विधानसभा में विश्वास मत (फ्लोर टेस्ट) हुआ था, जिसमें सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार ने आसानी से जीत हासिल कर ली थी। इस दौरान मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने सदन से वॉकआउट कर दिया था, जबकि टीवीके सरकार को एआईएडीएमके (AIADMK) के 25 बागी विधायकों का भी समर्थन मिल गया था।

    बहुमत का आंकड़ा और दलीय स्थिति

    तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई, सीपीआई (एम) और आईयूएमएल (IUML) के साथ मिलकर कुल 120 विधायकों का समर्थन जुटाया और जादुई आंकड़े को पार कर सरकार बनाई।

    हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोप खारिज

    इस पूरे सियासी घटनाक्रम और विधायकों के पाला बदलने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, और अब सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले में याचिका खारिज होने के बाद सरकार को बड़ी राहत मिली है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here