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    Homeराज्यमध्यप्रदेशराम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर शंकराचार्य का तीखा बयान

    राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर शंकराचार्य का तीखा बयान

    छिंदवाड़ा: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के छिंदवाड़ा आगमन पर उनके अनुयायियों और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया और श्रद्धालुओं से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने देश के वर्तमान धार्मिक, प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी मामले पर गहरा दुख प्रकट करने के साथ-साथ देश में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों पर भी चिंता जताई और इसके स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

    शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों को निम्नलिखित तीन मुख्य शीर्षकों के तहत समझा जा सकता है:

    राम मंदिर दान चोरी पर दुख और 'सनातन संरक्षण बोर्ड' का सुझाव

    शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और दान राशि के दुरुपयोग को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान करते हैं, इसलिए उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने देश के मंदिरों के संचालन और संरक्षण हेतु एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण बोर्ड’ या विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की, ताकि सरकारी नियंत्रण से इतर मंदिरों की व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।

    सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशासनिक समझ पर सवाल

    मंदिरों के प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को सनातन धर्म के विधि-विधान, पूजा-पद्धति, धार्मिक नैतिकता और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त समझ नहीं होती है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, वही उस कार्य को बेहतर ढंग से संभाल सकता है। इसलिए धार्मिक स्थलों का प्रबंधन प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धर्मशास्त्रों के ज्ञाताओं, अनुभवी संतों और विषय के विशेषज्ञों को ही सौंपा जाना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे।

    धर्मांतरण और 'लव जिहाद' को रोकने के लिए कड़े कानून की मांग

    धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी देश में 'संख्या बल' का बहुत बड़ा महत्व होता है, क्योंकि जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश पर शासन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत देश में इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिस पर सरकार और समाज उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जितना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को तत्काल रोकने के लिए कठोरतम कानून बनाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, जबकि संत समाज इस विषय में जनजागरण का कार्य लगातार कर रहा है।

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