तेल अवीव: ईरान और हमास के साथ जारी युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक राह बेहद मुश्किल हो गई है। वैश्विक मंच के साथ-साथ अब उनके अपने ही देश में तख्तापलट और राजनीतिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नेतन्याहू को यह सीधी चुनौती किसी बाहरी दल से नहीं, बल्कि कभी उनकी ही वॉर कैबिनेट का हिस्सा रहे इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से मिल रही है। गाजा जंग में अपने सगे बेटे और दो भतीजों को खोने वाले आइजनकोट अब नेतन्याहू के सबसे बड़े और मजबूत सियासी प्रतिद्वंदी बनकर उभरे हैं।
नई पार्टी 'याशार' के साथ नेतन्याहू पर सीधा प्रहार
सुरक्षा मामलों के कड़े जानकार माने जाने वाले 66 वर्षीय पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट ने हाल ही में अपनी नई सेंट्रिस्ट (मध्यमार्गी) पार्टी ‘याशार’ (जिसका अर्थ 'ईमानदार' है) की औपचारिक शुरुआत की है। पार्टी लॉन्च करते ही उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर निशाना साधा। आइजनकोट ने जनता को संबोधित करते हुए भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि अब जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम उस बड़ी आपदा को नजरअंदाज कर दें जो हमारे देश पर आई है, या फिर आपसी विभाजन को स्वीकार कर एक और नई तबाही की तरफ बढ़ें? उन्होंने देश को फिर से एकजुट करने और इसके पुनर्निर्माण का आह्वान किया है।
व्यक्तिगत त्रासदी और 40 साल का सैन्य अनुभव
अक्टूबर 2023 में हुए हमास के हमले के बाद शुरू हुई जंग में आइजनकोट ने अपने 25 साल के बेटे गल मेयर आइजनकोट और दो सगे भतीजों को खो दिया था। इस व्यक्तिगत नुकसान ने इजरायली जनता के दिलों में उनके प्रति गहरी संवेदना और सम्मान पैदा कर दिया है। लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं जो युद्ध की असली और भयानक कीमत को समझता है। एक साधारण कामकाजी परिवार से आने वाले आइजनकोट ने 40 वर्षों तक इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) में अपनी सेवाएं दी हैं और वे 2015 से 2019 तक देश के सेना प्रमुख भी रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी छवि किसी पारंपरिक, विभाजनकारी या लोकलुभावन (पॉपुलिस्ट) राजनेता जैसी नहीं है, जो उन्हें नेतन्याहू से बिल्कुल अलग और लोकप्रिय बनाती है।
रणनीतिहीन युद्ध का आरोप और कैबिनेट से इस्तीफा
गादी आइजनकोट ने साल 2024 में नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट से यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था कि प्रधानमंत्री के पास गाजा को लेकर कोई स्पष्ट और दूरदर्शी रणनीति नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि युद्ध के मैदान में मिली कुछ तात्कालिक सफलताओं को सरकार भूलवश हमास का पूर्ण खात्मा मान बैठी है, जो कि सच नहीं है। इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने सरकार का साथ छोड़ दिया और अब वे जनता के बीच सरकार की कमियों को उजागर कर रहे हैं।
अनिवार्य सैन्य सेवा का एजेंडा और चुनावी समीकरण
आइजनकोट की पार्टी ‘याशार’ का मुख्य एजेंडा देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को अचूक बनाना, युद्ध प्रभावित उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों का पुनर्विकास करना, शिक्षा व स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाना और 7 अक्टूबर को हुई सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक स्वतंत्र राज्य आयोग का गठन करना है। उन्होंने ‘सभी के लिए सेवा’ का नारा दिया है, जिसके तहत इजरायल के अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (कट्टरपंथी) यहूदियों और अरब नागरिकों के लिए भी सेना में काम करना अनिवार्य करने की बात कही गई है।
ताजा चुनावी सर्वे और रुझानों में आइजनकोट की पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और वह नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' के बाद दूसरे स्थान पर बनी हुई है। हालांकि, इजरायल की जटिल राजनीति में किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल दिख रहा है, लेकिन गठबंधन सरकार बनाने के मामले में आइजनकोट की स्थिति नेतन्याहू से बेहतर मानी जा रही है। इजरायल में आगामी अक्टूबर तक आम चुनाव होने की संभावना है, जहां आइजनकोट के सामने नेतन्याहू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की मौजूदगी भी एक बड़ी चुनौती होगी।


