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    सरसों के खेतों में गूंजा था लता मंगेशकर का जादू, हीरोइन की खूबसूरती ने बना दिया था गाना अमर

    नई दिल्ली। संगीत का हमारे जीवन से गहरा नाता है, और जब बात हिंदी सिनेमा की हो तो कुछ गाने सीधे रूह में उतर जाते हैं। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में एक ऐसा दौर भी था, जब गानों की लोकप्रियता फिल्मों की कहानी पर भी भारी पड़ जाती थी। संगीत प्रेमी आज भी उस दौर की धुनों को याद कर भावुक हो जाते हैं।

    70 के दशक का वो जादुई संगीत

    70 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए एक स्वर्णिम युग (Golden Era) माना जाता है। इस दौर में जो संगीत तैयार हो रहा था, उसमें एक अलग ही जादू था। उस समय के गीतकारों और संगीतकारों ने मिलकर कुछ ऐसे सदाबहार नगमे बनाए, जो दशकों बाद आज भी उतने ही नए और फ्रेश लगते हैं जितने उस वक्त लगते थे।

    फिल्मों से ज्यादा होती थी गानों की चर्चा

    यह वह दौर था जब थियेटर्स में फिल्में बाद में रिलीज होती थीं, लेकिन उनका संगीत हफ्तों पहले लोगों की जुबान पर चढ़ जाता था। कई बार तो ऐसा भी होता था कि कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती थी, लेकिन उसके गानों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री होती थी और वे लंबे समय तक रेडियो पर राज करते थे।

    दिलों में आज भी जिंदा हैं पुराने नगमे

    आज के दौर में भले ही रीमिक्स और फास्ट म्यूजिक का चलन बढ़ गया हो, लेकिन 70 के दशक की सादगी और गहराई आज भी बेजोड़ है। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और आशा भोंसले जैसे दिग्गज गायकों की आवाज में पिरोए गए वो गीत आज की युवा पीढ़ी को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि यह संगीत आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।

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