विविधा संस्था के संवाद में नेतृत्व विकास, चयन के अधिकार और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर हुआ मंथन
जयपुर। विविधा संस्था द्वारा सोमवार को राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति, झालाना संस्थान क्षेत्र, जयपुर में “किशोर-किशोरियों के संवैधानिक मूल्य व नेतृत्व” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के सात जिलों से आए 50 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, किशोर-किशोरियों, स्वतंत्र पत्रकारों, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विषय विशेषज्ञों एवं सरकारी अधिकारियों ने भाग लेकर किशोर अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की।
संस्था के कार्यों और अभियानों की दी जानकारी
कार्यक्रम का शुभारंभ विविधा संस्था की विजय लक्ष्मी जोशी ने स्वागत उद्बोधन एवं संस्था परिचय के साथ किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में महिला आलेखन एवं संदर्भ केंद्र के रूप में शुरू हुई विविधा संस्था लंबे समय से महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने संस्था द्वारा प्रकाशित “उजाला छड़ी” समाचार पत्र तथा वर्तमान में जयपुर की बस्तियों एवं सरकारी विद्यालयों में नेतृत्व विकास और शिक्षा पर चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।
इसके बाद संस्था की मोनिका, योगिता एवं डॉली ने प्रेरणादायी गीत “शिक्षा की रेल चली रे…” प्रस्तुत किया। वहीं मोनिका पाठक ने “परवाज़”, “आगाज़”, “हौसले हैं बुलंद” और “जानेंगे तो जिएंगे” जैसे अभियानों के माध्यम से शिक्षा, नेतृत्व विकास, जीवन कौशल, महिला अधिकार एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
नेतृत्व विकास और चयन के अधिकार पर हुई सार्थक चर्चा
कार्यक्रम में “स्कूलों में किशोर-किशोरियों का नेतृत्व विकास : विविधा का अनुभव” विषय पर आयोजित सत्र में वक्ताओं ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की योग्यता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच हैं।
इसके बाद आयोजित “किशोर-किशोरियों के चयन का अधिकार” विषयक सत्र में दिल्ली की निमिषा श्रीवास्तव ने किशोर न्याय एवं कानून से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज भी किशोर-किशोरियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की कई स्तरों पर अनदेखी होती है। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अजमेर की रेणु आर्य ने कहा कि प्रत्येक किशोर एवं किशोरी को शिक्षा, करियर, जीवनसाथी और भविष्य से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बाल विवाह, लैंगिक असमानता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर खुली चर्चा की आवश्यकता बताई।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बंबाला पुलिया की शिक्षिका पूनमा भाटिया ने विद्यालय और समुदाय के अनुभव साझा करते हुए नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, ई-सिगरेट और घरेलू हिंसा जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की।
परिवार, विद्यालय और समुदाय की भूमिका पर हुआ मंथन
द्वितीय सत्र “परिवार और स्कूल : संरक्षक?” में दीपक रावत ने कहा कि परिवार और विद्यालय को किशोर-किशोरियों के लिए सहयोगी और संवेदनशील वातावरण तैयार करना चाहिए। प्रिंस सलीम ने समुदाय की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया।
मोहिता कनोडिया ने कहा कि परिवार, विद्यालय, मित्र समूह और सोशल मीडिया सभी किशोरों के निर्णयों को प्रभावित करते हैं। इसलिए बच्चों पर निर्णय थोपने के बजाय उन्हें सही विकल्प चुनने में सहयोग देना समय की आवश्यकता है।
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
दोपहर बाद आयोजित “किशोर-किशोरियों के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य का अधिकार” विषयक सत्र का संचालन दिप्ता भोग ने किया। इस दौरान छाया पंचोली एवं पूर्णिमा गुप्ता ने वैज्ञानिक एवं अधिकार-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि किशोरों को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी सही, तथ्यपरक और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, सम्मानजनक व्यवहार और गोपनीयता को किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए अनिवार्य बताया।
सरकार से संवाद में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
कार्यक्रम के अंतिम सत्र “सरकार से संवाद” में शिक्षा संकुल की मधु शर्मा, राजेन्द्र भानावत, रेणुका पामेचा एवं अन्य प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों के सुझावों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किशोर-किशोरियों के अधिकारों, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं नेतृत्व विकास के लिए सरकार और नागरिक समाज के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
संवाद के दौरान भविष्य की कार्ययोजना के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें—
- कोर ग्रुप का गठन किया जाएगा।
- शिक्षा संकुल स्तर पर सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच नियमित संवाद समूह बनाया जाएगा।
- बालिका संवाद अभियान प्रारंभ किया जाएगा।
- एक साझा प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवाद प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस राज्य स्तरीय संवाद से प्राप्त सुझाव किशोर-किशोरियों के नेतृत्व विकास, चयन के अधिकार, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों तथा बाल-अनुकूल नीतियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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