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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संजय राउत बोले- ‘क्या अखिलेश यादव रामभक्त नहीं?’

    मुंबई। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने मंदिर में हुई इस कथित धांधली को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर राजनीतिक और वैचारिक संगठनों की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया है।

    ट्रस्ट के पदाधिकारियों और एकतरफा विचारधारा पर तीखा हमला

    सांसद संजय राउत ने राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संरचना पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इस पूरे प्रबंधन तंत्र में शामिल हर व्यक्ति एक ही ढर्रे पर काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष से लेकर कोषाध्यक्ष तक सभी पदाधिकारी एक ही विशेष राजनीतिक और सामाजिक विचारधारा से जुड़े हुए हैं, जिसके कारण वहां पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवान राम किसी राजनीतिक दल या संगठन की निजी जागीर बन चुके हैं और क्या देश के बाकी नागरिक रामभक्त होने की पात्रता नहीं रखते हैं।

    विपक्षी नेताओं की आस्था और बीजेपी-आरएसएस पर सीधा निशाना

    राउत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एकाधिकार वाले दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने देश के अन्य प्रमुख विपक्षी क्षत्रपों का नाम लेते हुए पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भगवान राम की भक्त नहीं हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सत्तापक्ष खुद को राम का एकमात्र ठेकेदार साबित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि इस देश का हर नागरिक अपनी-अपनी आस्था के अनुसार प्रभु राम से जुड़ा हुआ है।

    विभिन्न धार्मिक स्थलों के प्रबंधन पर लगाया लूट का बड़ा आरोप

    राम मंदिर में सुरक्षा और प्रबंधन की लापरवाही के चलते हुई इस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट द्वारा दो कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की घटना को उन्होंने महज एक दिखावा करार दिया। विपक्षी नेता ने आरोप लगाया कि केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के जितने भी प्रमुख और पौराणिक मंदिर वर्तमान में बीजेपी के प्रभाव या उनके नियंत्रण में हैं, वहां बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां और घोटाले सामने आ रहे हैं। उन्होंने अयोध्या से लेकर बदरीनाथ और सोमनाथ मंदिर तक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन पावन धामों में आस्था के नाम पर सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक लूट का खेल चल रहा है।

    मंदिरों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच को लेकर देशव्यापी बहस की मांग

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश के प्रतिष्ठित और आस्था से जुड़े बड़े मंदिरों की सुरक्षा तथा उनके चढ़ावे के पारदर्शी ऑडिट को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। संजय राउत के इस तीखे बयान के बाद विपक्षी खेमा अब इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक रुख अख्तियार करने की तैयारी में है। विपक्ष की मांग है कि आस्था के इन केंद्रों को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रखा जाए और चढ़ावे में हुई चोरी की इस पूरी घटना की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से गहन जांच कराई जाए ताकि सच देश के सामने आ सके।

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