दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और वहां के पर्यावरण को बचाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और अधिक तेज हो गया है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता, वैज्ञानिक और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनशन (भूख हड़ताल) को आज लगातार 17 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच, मनोरंजन जगत की बेहद सम्मानित और दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने सोनम वांगचुक के इस निस्वार्थ संघर्ष का खुलकर समर्थन किया है।
जीनत अमान ने सोशल मीडिया पर एक बेहद विचारणीय और भावुक संदेश साझा करते हुए सोनम वांगचुक के तेजी से बिगड़ते स्वास्थ्य और गिरते हुए ऑवरल मेडिकल पैरामीटर्स पर अपनी गहरी चिंता और व्याकुलता व्यक्त की है। उन्होंने देश के नागरिकों और नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) और एक सच्चे देशभक्त की जान की रक्षा के लिए आगे आएं।
सोनम वांगचुक का कड़ा संकल्प; कड़कड़ाती ठंड और गिरते ऑक्सीजन स्तर के बीच 17 दिनों से डटे
दिल्ली के लद्दाख भवन में चल रहे इस शांतिपूर्ण सत्याग्रह की स्थिति दिन-ब-दिन बेहद नाजुक होती जा रही है:
स्वास्थ्य में भारी गिरावट: चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम के अनुसार, लगातार 17 दिनों से अन्न का एक भी दाना न लेने के कारण सोनम वांगचुक का वजन कई किलो घट चुका है। उनके शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) और ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे आ गया है।
लद्दाख की आवाज बने वांगचुक: इस बेहद खराब होते स्वास्थ्य के बावजूद सोनम वांगचुक का हौसला टस से मस नहीं हुआ है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक केंद्र सरकार लद्दाख के स्थानीय लोगों को उनके जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा की गारंटी और लोकतांत्रिक अधिकार नहीं दे देती, उनका यह अनशन इसी तरह जारी रहेगा।
जीनत अमान ने पर्यावरण और लद्दाख के ग्लेशियरों को बचाने की वकालत की; पोस्ट में लिखी दिल की बात
फिल्मी चकाचौंध से दूर सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर हमेशा बेबाकी से राय रखने वाली अभिनेत्री जीनत अमान ने सोनम वांगचुक के इस संघर्ष को पूरे देश के भविष्य से जोड़कर देखा है। उन्होंने अपने शोक और चिंता को व्यक्त करते हुए लिखा कि:
"सोनम वांगचुक कोई साधारण आंदोलनकारी नहीं हैं; वे एक ऐसे दूरदर्शी इंसान हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा के सुधार और पर्यावरण को सहेजने में लगा दिया। आज जब वे दिल्ली में अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना 17 दिनों से भूखे बैठे हैं, तो हमारा चुप रहना एक अपराध जैसा है। लद्दाख के ग्लेशियर केवल लद्दाख के नहीं, बल्कि पूरे भारत की नदियों और जीवन का मुख्य स्रोत हैं। अगर वे पिघल गए, तो पूरा देश पानी के संकट से जूझेगा।"
जीनत अमान ने आगे लिखा कि:
"मैं प्रशासन और सत्ता में बैठे लोगों से करबद्ध प्रार्थना करती हूं कि वे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की गंभीरता को समझें और उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द इस गतिरोध को समाप्त करें, ताकि एक अमूल्य जीवन को सुरक्षित बचाया जा सके।"
क्या हैं सोनम वांगचुक की मुख्य मांगें? क्यों पूरे देश से मिल रहा है समर्थन?
सोनम वांगचुक और लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों का यह आंदोलन मुख्य रूप से लद्दाख के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए चार सूत्रीय एजेंडे पर आधारित है:
छठी अनुसूची (6th Schedule) का दर्जा: लद्दाख को पूर्ण केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद स्थानीय लोग चाहते हैं कि इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि वहां की जनजातीय संस्कृति और जमीन को बाहरी उद्योगों और भू-माफियाओं के बड़े व्यावसायिक शोषण से बचाया जा सके।
पूर्ण राज्य का दर्जा और विधायी शक्ति: आंदोलनकारियों की मांग है कि लद्दाख को अपनी विधानसभा के साथ एक पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, ताकि वहां के लोग अपनी नीतियां खुद तय कर सकें।
पर्यावरण का संरक्षण: हिमालयी क्षेत्र में कॉर्पोरेट खनन (माइनिंग) और अनियंत्रित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे लद्दाख के संवेदनशील ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
जीनत अमान के इस बड़े और खुले समर्थन के बाद सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक के पक्ष में एक नई लहर दौड़ गई है। देश भर के पर्यावरण प्रेमी, छात्र और सामाजिक संगठन अब दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सरकार पर इस मसले का जल्द ही कोई शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान निकालने का दबाव काफी बढ़ गया है।


