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    वीणा मानवी के लिए एक सिग्नेचर बना मुश्किल, पूरी तैयारी के बावजूद अटक गया चयन

    पटना: बिहार की राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से पहले एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। यहाँ जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) की मुख्य उम्मीदवार वीणा मानवी उर्फ वीणा मांडवी का नामांकन पत्र आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया गया है।

    इस निरस्तीकरण (रिजेक्शन) की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि प्रत्याशी के पास न तो किसी जरूरी दस्तावेज की कमी थी और ना ही वे किसी कानूनी विवाद में फंसी थीं। इसके बावजूद, महज एक छोटी सी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक के कारण चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही उनकी उम्मीदवारी पर पूरी तरह से पूर्णविराम लग गया। स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान निर्वाचन अधिकारियों ने आवेदन में एक बड़ी संवैधानिक त्रुटि पकड़ी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए उनका पर्चा तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

    सख्त चुनावी नियमावली: 10 समर्थकों की अनिवार्यता के सामने अधूरे रह गए वीणा मानवी के दस्तावेज

    भारत निर्वाचन आयोग की नियमावली के अनुसार, किसी भी चुनाव में गैर-मान्यता प्राप्त या छोटे राजनीतिक दलों की ओर से मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए नामांकन पत्र में न्यूनतम 10 प्रस्तावकों (समर्थकों) का हस्ताक्षर होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह नियम निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी समान रूप से लागू होता है।

    समीक्षा के दौरान जब बांकीपुर के निर्वाचन अधिकारियों ने वीणा मानवी के आवेदन पत्र की गहन जांच की, तो उसमें केवल 9 प्रस्तावकों के ही दस्तखत पाए गए। नियमों के मुताबिक, एक भी प्रस्तावक के हस्ताक्षर की यह कमी एक गंभीर प्रक्रियात्मक दोष मानी जाती है। निर्वाचन अधिकारियों ने इसे तय चुनावी गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन मानते हुए आवेदन को खारिज करने का फैसला सुनाया। इस एक छोटी सी चूक ने बांकीपुर के पूरे चुनावी समीकरण को रातों-रात बदल कर रख दिया है।

    बांकीपुर: जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी का सख्त एक्शन, 6 निर्दलीय समेत 14 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द

    इस उपचुनाव के लिए दाखिल किए गए सभी नामांकनों की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक सख्ती का व्यापक असर देखने को मिला। कड़ी कानूनी पड़ताल के बाद चुनाव अधिकारियों ने कुल 14 प्रत्याशियों के आवेदनों को खारिज कर दिया है।

    प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पर्चा गंवाने वाले इन उम्मीदवारों में 6 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं, जबकि शेष 8 उम्मीदवार विभिन्न छोटे और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के बैनर तले अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे। अलग-अलग तकनीकी कमियों, शपथ पत्रों में अधूरी जानकारियों और दस्तावेजों के सत्यापन में विफल रहने के कारण इन सभी की चुनावी महत्वाकांक्षाओं को गहरा झटका लगा है और वे इस रेस से बाहर हो गए हैं।

    नामांकन प्रक्रिया में बरते अतिरिक्त सावधानी: चुनाव आयोग ने स्पष्ट कीं निरस्तीकरण की मुख्य वजहें

    निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जरा सी भी लापरवाही या शॉर्टकट उम्मीदवारों को भारी पड़ सकता है। आयोग ने नामांकन रद्द होने के कुछ सबसे प्रमुख और आम कारणों को रेखांकित किया है, जो इस प्रकार हैं:

    • अधूरे दस्तावेज: हलफनामे (एफिडेविट) में मांगी गई संपत्तियों, देनदारियों या आपराधिक मामलों की जानकारी को पूरी तरह से स्पष्ट न करना या छिपाना।

    • प्रारूप का उल्लंघन: चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित किए गए आधिकारिक फॉर्म और फॉर्मेट का पालन न करते हुए त्रुटिपूर्ण आवेदन जमा करना।

    • प्रस्तावकों की कमी: छोटे दलों या निर्दलीयों के मामले में अनिवार्य 10 स्थानीय मतदाताओं के वैध हस्ताक्षर न होना।

    आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और भावी उम्मीदवारों को सख्त हिदायत दी है कि वे भविष्य में दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करते समय कानूनी विशेषज्ञों की सलाह लें और अतिरिक्त सावधानी बरतें।

    जनशक्ति जनता दल की चुनावी रणनीति ध्वस्त: उपचुनाव की सीधी टक्कर से बाहर हुई पार्टी

    वीणा मानवी का पर्चा खारिज होना जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी ने बांकीपुर के इस चुनावी समर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए वीणा मानवी को एक बड़े चेहरे के रूप में पेश किया था। महिला विंग की प्रमुख और एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण जमीनी स्तर पर उनके पक्ष में माहौल भी बनने लगा था और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह था।

    लेकिन केवल एक हस्ताक्षर की तकनीकी चूक ने पूरी पार्टी की महीनों की रणनीतिक तैयारियों और प्रचार अभियानों पर पानी फेर दिया है। इस तकनीकी विफलता के कारण जेजेडी अब सीधे तौर पर बांकीपुर उपचुनाव की मुख्य लड़ाई से पूरी तरह बेदखल हो गई है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बड़े दलों के बीच नए राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ेगा।

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