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    अमेरिका का बड़ा सैन्य ऑपरेशन, डेढ़ घंटे तक ईरानी ठिकानों पर बरसे हमले

    वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों ओर से ताबड़तोड़ हमलों का सिलसिला शुरू हो चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों की दूसरी लहर (सेकंड वेव) के तहत एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। इस दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने लगभग 90 मिनट तक ईरानी ठिकानों पर भारी बमबारी की। सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का सीधा निशाना ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त करना है, जिनका इस्तेमाल वह 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को डराने और धमकाने के लिए करता आ रहा है।

    ग्रेटर टुंब आइलैंड में अमेरिका के सटीक और विनाशकारी हमले

    सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार सुबह ठीक 6 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरान के खिलाफ इस आक्रामक सैन्य अभियान का पहला दौर शुरू किया था। पूरे डेढ़ घंटे तक चले इस हवाई हमले में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'ग्रेटर टुंब आइलैंड' को निशाना बनाया। इस दौरान वहां मौजूद ईरान के तटीय रक्षा तंत्र (कोस्टल डिफेंस सिस्टम), क्रूज मिसाइलों के बड़े भंडारों (स्टोरेज) और उनके लॉन्चिंग पैड्स पर सटीक हमले कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया।

    बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवार

    अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जोरदार जवाबी कार्रवाई की है। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन के 'अल-अजराक' में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर भीषण हमला किया। इस हमले में अमेरिकी सेना के उन शेल्टरों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया, जहां अत्याधुनिक एफ-15, एफ-16 और एफ-35 फाइटर जेट्स के साथ-साथ खतरनाक एमक्यू-9 (MQ-9) रणनीतिक ड्रोन तैनात थे। ईरान का आरोप है कि उसके खिलाफ होने वाले अधिकांश अमेरिकी हवाई हमले इसी जॉर्डन वाले बेस से संचालित किए जा रहे थे।

    ईरान की जॉर्डन के नागरिकों से अपील और बहरीन में 5वें फ्लीट पर हमला

    जॉर्डन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाने के बाद आईआरजीसी ने वहां के स्थानीय नागरिकों से एक भावुक और भड़काऊ अपील की है। ईरान ने जॉर्डन की जनता से कहा है कि वे अपने देश से अमेरिकी ताकतों की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म करें और अपनी धरती का इस्तेमाल इस्लामी देशों व फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ न होने दें। वहीं दूसरी तरफ, ईरानी नौसेना ने बहरीन में तैनात अमेरिका के कुख्यात 'पांचवें फ्लीट' (5th Fleet) के मुख्यालय पर भी धावा बोला। इस हमले में अमेरिकी नौसेना के एनएसआई मैनेजमेंट सेंटर, सैन्य उपकरणों के बड़े वेयरहाउस, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ईंधन भंडारों (फ्यूल स्टोरेज) को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा हिंद महासागर में नौसैनिक बेड़े तैनात करने और होर्मुज में की गई समुद्री नाकाबंदी के विरोध में की गई है।

    तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी नागरिक को किया रिहा, डोनाल्‍ड ट्रम्प ने की तारीफ

    इस भीषण युद्ध जैसे हालात और भारी गोलाबारी के बीच एक चौंकाने वाली कूटनीतिक राहत भी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी देते हुए बताया कि ईरान ने एक अमेरिकी नागरिक को सुरक्षित रूप से अपने देश से जाने की अनुमति दे दी है। इस नागरिक को दिसंबर 2024 में जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान ईरान में गलत तरीके से हिरासत में लिया गया था। ट्रम्प ने लिखा कि वह अमेरिकी नागरिक अब ईरान की सीमा से बाहर है और पूरी तरह स्वस्थ है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने युद्ध के इस माहौल के बीच ईरान द्वारा दिखाई गई इस 'सद्भावना' और अच्छी मंशा वाले कदम की खुलकर सराहना की है।

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