यवतमाल। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों—कपास, सोयाबीन और तुअर—को बारिश के लंबे अंतराल के कारण भारी नुकसान पहुँचा है। पैदावार में आई इस बड़ी गिरावट के बाद अब रबी सीजन पर भी सूखे का संकट गहराने लगा है। फसलें चौपट होने से आर्थिक तंगी झेल रहे किसानों के सामने दिवाली का त्योहार मनाने और रबी बुआई के लिए पूंजी जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों की इसी बेबसी का फायदा उठाने के लिए जिले में निजी साहूकार सक्रिय होने लगे हैं।
115 पंजीकृत साहूकारों ने बांटा लाखों का कर्ज
वर्ष 2024-25 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यवतमाल जिले में कुल 115 लाइसेंसधारी साहूकार पंजीकृत हैं। इनके द्वारा कुल 75 लाख 69 हजार रुपये का कर्ज बांटे जाने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। यद्यपि इसमें व्यापारियों और अन्य वर्गों के लिए कर्ज का प्रावधान शामिल था, परंतु समीक्षा अवधि के दौरान किसी भी व्यापारी द्वारा कर्ज लिए जाने का रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में यह पूरी राशि किसानों द्वारा ही लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूखे के मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में अवैध साहूकारों के भी सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है।
साहूकारी कर्ज और ब्याज वसूली के कड़े नियम
लाइसेंसधारी साहूकारों द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर शासन द्वारा वार्षिक ब्याज दरें पहले से निर्धारित हैं, जिससे वे मनमाना ब्याज वसूल नहीं कर सकते। नियमानुसार साहूकार किसी भी कर्जदार से मूलधन की दोगुनी राशि से अधिक ब्याज वसूल नहीं कर सकता है। इसके अलावा कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज लगाने, वसूली के नाम पर जबरन संपत्ति अपने नाम कराने और किसी भी प्रकार का छिपा हुआ अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है।
तहसीलवार साहूकारों की स्थिति और झरी जामणी में शून्य पंजीकरण
जिले में लाइसेंसधारी साहूकारों का वितरण काफी असमान है। यवतमाल तहसील में सर्वाधिक 41 और घाटंजी तहसील में 17 पंजीकृत साहूकार मौजूद हैं। इसके बाद नेर और पुसद तहसीलों में 12-12 साहूकार दर्ज हैं। केलापुर तथा रालेगांव में 5-5, बाबुलगांव में 4, जबकि कलंब, दरव्हा, दिग्रस और मारेगांव तहसीलों में 3-3 साहूकार कार्यरत हैं। उमरखेड, महागांव, आर्णी और वणी में 2-2 साहूकार पंजीकृत हैं, जबकि झरी जामणी तहसील में एक भी लाइसेंसधारी साहूकार मौजूद नहीं है।


