भीषण गर्मी और उमस के मौसम में त्वचा पर अतिरिक्त तेल (सीबम) आने की समस्या काफी बढ़ जाती है। इसके कारण चेहरा न सिर्फ चिपचिपा और बेजान नजर आता है, बल्कि कई तरह की त्वचा संबंधी बीमारियां भी घेर लेती हैं। स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खूबसूरत और सेहतमंद त्वचा के लिए इस अतिरिक्त ऑयल को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है। जब चेहरे पर जरूरत से ज्यादा तेल जमा होने लगता है, तो वह त्वचा के बारीक रोम छिद्रों (पोर्स) को ब्लॉक कर देता है। बंद पोर्स की वजह से चेहरे पर कील-मुंहासे, ब्लैकहेड्स और एक्ने की समस्या तेजी से पनपने लगती है। अगर इस ऑयल को सही तरीकों से कंट्रोल कर लिया जाए, तो त्वचा साफ, तरोताजा और चमकदार बनी रहती है।
चेहरे का नूर छीन लेती है चिपचिपाहट
गर्मियों के दिनों में वातावरण में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) अधिक होने के कारण स्किन ग्लैंड्स ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं। अत्यधिक पसीने और धूल-मिट्टी के साथ मिलकर यह तेल चेहरे पर एक परत बना लेता है, जिससे चेहरा हमेशा थका हुआ, डल और बुझा-बुझा सा दिखने लगता है। ऑयली स्किन की एक बड़ी समस्या यह भी है कि इस पर किया गया कोई भी मेकअप ज्यादा देर टिक नहीं पाता और बहुत जल्दी खराब हो जाता है।
दैनिक दिनचर्या में करें ये 6 जरूरी बदलाव
सैलिसिलिक एसिड फेसवॉश: दिन में दो बार सैलिसिलिक एसिड युक्त माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करें। ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा रूखा करने वाले क्लींजर का इस्तेमाल न करें।
बार-बार चेहरा धोने से बचें: कई लोग चिपचिपाहट मिटाने के लिए दिन में कई बार मुंह धोते हैं। ऐसा करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है और बचाव के लिए स्किन और ज्यादा तेल बनाने लगती है।
जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर: यह सोच बिल्कुल गलत है कि ऑयली स्किन को मॉइस्चराइजर की जरूरत नहीं होती। गर्मियों में त्वचा का संतुलन बनाए रखने के लिए लाइटवेट, ऑयल-फ्री और जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर का उपयोग करें।
मैट-फिनिश सनस्क्रीन: धूप में निकलने से आधा घंटा पहले जेल-बेस्ड या मैट-फिनिश सनस्क्रीन लगाना न भूलें, जो त्वचा को चिपचिपा बनाए बिना धूप से सुरक्षा देती है।
मुल्तानी मिट्टी का पैक: हफ्ते में एक या दो बार मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह त्वचा के अतिरिक्त तेल को सोखने का सबसे बेहतरीन उपाय है।
प्राकृतिक नुस्खे: त्वचा को अंदरूनी ठंडक देने के लिए नियमित रूप से खीरे का रस या ताजा एलोवेरा जेल चेहरे पर लगाएं।
खान-पान में सुधार से दिखेगा असर
हमारी डाइट का सीधा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है, इसलिए खान-पान को लेकर सजग रहना जरूरी है:
भरपूर पानी पिएं: दिनभर में पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और त्वचा में सीबम का निर्माण कम होता है।
डिटॉक्स ड्रिंक्स: नारियल पानी और नींबू पानी को अपनी रूटीन में शामिल करें, यह शरीर को अंदर से साफ करते हैं।
पानी वाले फल खाएं: तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे पानी से भरपूर फलों का सेवन त्वचा को फ्रेश रखता है। इसके अलावा हरी सब्जियां और सीमित मात्रा में नट्स खाएं।
परहेज जरूरी: अत्यधिक तली-भुनी चीजें, तेज मसाले, मीठे पकवान और जंक फूड से पूरी तरह दूरी बना लें, क्योंकि ये चेहरे पर पिंपल्स को बढ़ावा देते हैं।
विशेषज्ञ की विशेष सलाह
जाने-माने त्वचा रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी के दिनों में तेज धूप और उमस के कारण स्किन एलर्जी, टैनिंग और मुहांसों की शिकायत आम हो जाती है। विशेष रूप से थायराइड और डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित मरीजों की त्वचा अक्सर अंदरूनी रूप से शुष्क हो जाती है, इसलिए उन्हें ऐसे मॉइस्चराइजर का चयन करना चाहिए जो नॉन-कॉमेडोजेनिक हो (यानी जिससे पोर्स बंद न हों)।
इसके साथ ही, टीनएजर्स को ऑयल-बेस्ड हैवी कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल से बचना चाहिए और उसकी जगह वाटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड सन प्रोटेक्शन वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स चुनने चाहिए। समर सीजन में त्वचा को इंफेक्शन से बचाने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल-सब्जियां खाएं और खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें।


