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    Homeराजनीतिमहाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू

    महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू

    मुंबई।  महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि वह आज उन्हीं लोगों के साथ सरकार में हैं, जिन्होंने कभी उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।
    अजित पवार का यह बयान भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल के आरोपों के बाद में आया है। मुरलीधर ने पुणे नगर निगम चुनावों को लेकर सवाल उठाया था कि एनसीपी ऐसे उम्मीदवारों को टिकट क्यों दे रही है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अजित पवार ने बिना भाजपा का नाम लिए कहा कि जिन लोगों ने कभी उन पर 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले जैसे आरोप लगाए थे, वही लोग आज उनके साथ सत्ता में हैं। सिर्फ आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता है, जब तक अदालत में अपराध साबित न हो जाए। वहीं, अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा है कि अगर उन्होंने बोलना शुरू किया, तो अजित पवार मुश्किल में पड़ सकते हैं। उन्हें आरोप लगाने से पहले खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए।

     पहले खुद के गिरेबान में झांके अजित
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार आखिर किस पार्टी की बात कर रहे हैं। क्या वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा पर शक कर रहे हैं? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से किसी का भला नहीं होगा। अगर भाजपा भी इसी तरह जवाब देने लगे, तो यह अजित पवार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। यह सियासी टकराव ऐसे समय पर सामने आया है, जब 15 जनवरी को पुणे नगर निगम चुनाव हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार में सहयोगी होने के बावजूद भाजपा और एनसीपी नगर निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं। वहीं, अजित पवार की पार्टी शरद पवार गुट के साथ मैदान में है।

    अजित एनसीपी को शरद पवार की पार्टी में मर्ज करें
    शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) में विलय कर लेना चाहिए। संजय राउत ने सवाल उठाया कि जब अजित पवार खुद भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, तो वे फिर महायुति सरकार में क्यों बने हुए हैं।

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