मुंबई। महाराष्ट्र में छठ पूजा का त्योहार आने से पहले ही इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सियासत तेज हो गई है। राज ठाकरे की अगुआई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने छठ पूजा के दौरान होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए सरकार और प्रशासन से विस्तृत एसओपी जारी करने की मांग उठाई है। मनसे का तर्क है कि समुद्र और नदियों के तटों पर पूजा आयोजन के बाद बड़े पैमाने पर प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा हो जाता है, जिससे जल और तटवर्तीय पर्यावरण दूषित होता है।
गणेशोत्सव और दिवाली की तर्ज पर छठ पूजा के लिए बने एसओपी
मनसे के प्रदेश उपाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता कुशल धुरी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी धार्मिक त्योहार का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि विशुद्ध रूप से पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से यह मांग उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गणेशोत्सव, दिवाली तथा अन्य बड़े सार्वजनिक पर्वों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गाइडलाइंस जारी की जाती हैं, ठीक उसी तरह छठ पूजा के लिए भी प्रशासनिक एसओपी बनाई जानी चाहिए।
शिंदे शिवसेना ने जताया कड़ा ऐतराज, लगाया हिंदू त्योहारों को घेरने का आरोप
मनसे की इस मांग पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष व शिंदे शिवसेना के नेता सिद्धेश कदम ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और बोर्ड हमेशा पर्यावरण को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन हर बार केवल हिंदू त्योहारों को ही निशाना बनाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस मामले में विद्वेष की राजनीति फैला रहे हैं और उत्तर प्रदेश चुनावों के मद्देनजर उत्तर भारतीय समुदाय को ध्यान में रखकर यह बयानबाजी की जा रही है।
आनंद दुबे ने कहा- सनातन धर्म में पर्यावरण रक्षा की परंपरा
शिंदे शिवसेना के प्रवक्ता और उत्तर भारतीय नेता आनंद दुबे ने भी मनसे पर तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल बालासाहेब ठाकरे की संपत्ति के उत्तराधिकारी बने हैं, उनके विचारों के नहीं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में सदैव पर्यावरण का ध्यान रखकर ही पर्व मनाए जाते हैं। छठ मइया, गोदावरी, दुर्गा, एकवीरा और तुलजा भवानी हमारी आस्था के केंद्र हैं, और कुछ लोग बहकावे में आकर इसका विरोध कर रहे हैं। फिलहाल छठ पूजा में अभी कुछ समय शेष है, लेकिन महाराष्ट्र के सियासी हलकों में इसे लेकर खींचतान काफी बढ़ गई है।


