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    मासूम बहनों के साथ अपराध करने वाले दोषी को अंतिम सांस तक कैद, कोर्ट का कड़ा रुख

    सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में दो मासूम सगी बहनों के साथ यौन उत्पीड़न करने वाले एक इलेक्ट्रीशियन को अदालत ने दोषी करार देते हुए जीवन की आखिरी सांस तक जेल में काटने (आजीवन कारावास) की कड़ी सजा सुनाई है। अनपरा थाना क्षेत्र से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) / विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट ओमकार शुक्ल की अदालत ने रिकॉर्ड गति दिखाते हुए महज चार महीने और चार दिन के भीतर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसके अलावा दोषी पर 73 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, सात और नौ साल की इन दोनों मासूम बच्चियों के साथ यह कुकृत्य पिछले एक साल से लगातार किया जा रहा था। इस खौफनाक सच्चाई का खुलासा तब हुआ जब स्कूल में एक शिक्षिका ने छात्राओं को 'गुड टच और बैड टच' के अंतर के बारे में जागरूक किया।

    बिजली बनाने के बहाने घर आता था आरोपी

    यह मामला गत 23 फरवरी को प्रकाश में आया था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि अनपरा के अशोक नगर इलाके में रहने वाला और मूल रूप से झारखंड के मेराल थाना क्षेत्र के बिकताम गांव का निवासी फैयाज उर्फ फैज पीड़ित परिवार के घर बिजली के उपकरण ठीक करने के बहाने अक्सर आता-जाता था। इसी जान-पहचान और भरोसे का फायदा उठाकर वह पिछले एक साल से दोनों मासूम बहनों का यौन शोषण कर रहा था। आरोपी उन्हें बहला-फुसलाकर घर की छत पर ले जाता था और उनके साथ घिनौनी हरकतें करता था। घटना की जानकारी मिलने पर पीड़िताओं की मां की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया और तफ्तीश पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

    रिकॉर्ड समय में पूरी हुई सुनवाई

    मामले की गंभीरता और सोनभद्र जिले में इस तरह के पहले सनसनीखेज प्रकरण को देखते हुए न्यायालय ने भी सुनवाई में विशेष तेजी बरती। मुकदमे की त्वरित सुनवाई के लिए हर सप्ताह तारीख तय की गई। आरोप तय होने के दिन से महज चार माह चार दिन के अंतराल में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं। मंगलवार को दोषी को सजा सुनाए जाने से पहले बचाव पक्ष के वकीलों ने कम से कम सजा दिए जाने का आग्रह किया था।

    'विश्वास का फायदा उठाने वाले को कोई राहत नहीं'

    अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषी पीड़िताओं के घर लंबे समय से आता-जाता था। उसने पारिवारिक विश्वास का घिनौना फायदा उठाते हुए न सिर्फ मासूम बच्चियों का यौन उत्पीड़न किया, बल्कि उनके परिवार की महिलाओं पर झूठे लांछन भी लगाए। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार के जघन्य कृत्य से न केवल नाबालिग बहनों की निजता और गरिमा भंग हुई है, बल्कि पूरे परिवार की सामाजिक मर्यादा भी धूमिल हुई है। अपराध की गंभीरता और इसके तरीके को देखते हुए दोषी को किसी भी प्रकार की नरमी या राहत नहीं दी जा सकती।

    शेष प्राकृतिक जीवन काल तक रहेगी कैद

    विशेष लोक अभियोजक दिनेश अग्रहरि ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि आजीवन कारावास दो श्रेणियों का होता है। एक सामान्य उम्रकैद होती है जिसमें कैदी के अच्छे आचरण या वृद्धावस्था को देखकर सरकार स्तर पर सजा में छूट का प्रावधान हो सकता है, लेकिन 'शेष प्राकृतिक जीवन काल तक' (प्राकृत जीवन काल) सुनाई जाने वाली सजा के तहत दोषी को अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे ही रहना पड़ता है। इस मामले में भी अदालत ने इसी कठोर प्रावधान के तहत फैसला सुनाया है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की मुस्तैदी तथा गवाहों के पुख्ता समर्थन से इस गंभीर मामले में दोषी को सख्त सजा दिलाने में सफलता मिली है।

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