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    ‘दीये जलाने पर करोड़ों खर्च, मंदिरों में तेल नहीं’, अशोक गहलोत ने उठाए सवाल

    जयपुर। राजस्थान के देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले करीब 460 मंदिरों में दीपोत्सव की तैयारियों पर बजट जारी न होने से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दीपावली आयोजनों के लिए मिलने वाली करीब 1.25 लाख रुपये की राशि अब तक अटका कर रखी गई है। इस देरी पर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 33 लाख दीये जलाकर रिकॉर्ड बनाने का दावा करने वाली भाजपा के शासन में राजस्थान के मंदिरों में दीपावली पर दीपदान के लिए महज दो लीटर तेल और 50 दीपकों तक का बजट अटका पड़ा है।

    सोशल मीडिया पर पूर्व सीएम गहलोत का हमला

    अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा कि धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार के शासन में प्रदेशभर के लगभग 460 मंदिरों में दीपोत्सव की तैयारियों के लिए बजट जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हर साल दीपावली से करीब एक महीने पहले जारी होने वाली राशि अब तक अटकी हुई है, जबकि अगले सप्ताह से छह दिवसीय दीपोत्सव पर्व की शुरुआत होने जा रही है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जो पार्टी दिन-रात सनातन की बात करती है, वह मंदिरों में दीपक जलाने का बजट समय पर नहीं दे पा रही है, जो कि सीधी तौर पर आस्था के साथ खिलवाड़ है।

    बजट के अभाव में प्रभावित हो सकती हैं धार्मिक परंपराएं

    सामान्य तौर पर पर्व से करीब एक महीने पहले राशि जारी हो जाती है, जिससे भगवान के विशेष श्रृंगार, भोग, फूल बंगला, दीपदान, रंगोली और अन्नकूट जैसे आयोजनों की तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाती हैं। पिछले साल भी यह राशि लगभग 25 दिन पहले मिल गई थी। लेकिन इस बार अब तक फंड जारी नहीं होने के कारण पुजारियों और व्यवस्थापकों के सामने कम समय में सभी इंतजाम जुटाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

    प्रदेशभर के 460 मंदिरों की दीपोत्सव व्यवस्था पर असर

    देवस्थान विभाग के राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के तहत अकेले जयपुर में 32 और पूरे प्रदेश में कुल 460 मंदिर आते हैं। इन सभी मंदिरों में पंचपर्वा दीपोत्सव के लिए मिलने वाली करीब 1.25 लाख रुपये की राशि के अटके होने से व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। वर्तमान में रोशनी और दीपदान के लिए महज दो लीटर तेल और 50 दीपक उपलब्ध कराने की ही सीमित व्यवस्था है। लंबे समय से इस दायरे में विस्तार नहीं किए जाने और अब बजट की फाइल अटकने से मंदिरों की दीपावली तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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