नागपुर। नागपुर महानगरपालिका (मनपा) के स्लम विभाग और नगर रचना विभाग की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सूचना आयोग ने 15 दिनों के भीतर 68 परिवारों के अधिकार वाली जमीन का प्रमाणित नक्शा और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम जारी किया है। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 14 महीने से दस्तावेजों के लिए भटक रहे नागरिकों को जानकारी न देने और टालमटोल रवैये पर आयोग ने मनपा प्रशासन के प्रति सख्त नाराजगी जताई है।
दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण पट्टों से वंचित
जरीपटका की इंदिरानगर बस्ती के 68 परिवार सालों से मालिकाना पट्टों से वंचित हैं। यह बस्ती मौजा इंदोरा के खसरा नंबर 25/1, स्लम कोड 410 के अंतर्गत आती है। वर्ष 2014 में यहां बीएसयूपी योजना के तहत 366 एसआरए (SRA) मकानों की योजना लागू की गई थी। हालांकि, वर्ष 2016 के बाद दस्तावेजों में आई विसंगतियों की वजह से 68 परिवार जमीन के अधिकार से वंचित रह गए। दस्तावेजी अधिकार हासिल करने के लिए इंदिरानगर गृह निर्माण सहकारी संस्था के सचिव ने प्रमाणित नक्शे और कागजात हेतु आरटीआई आवेदन दिया था। लेकिन जब 14 महीने तक विभिन्न विभागों के चक्कर काटने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो यह मामला राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ पहुंचा।
विभागों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली पर आयोग सख्त
दस्तावेजों को लेकर मनपा के विभिन्न विभागों के बीच लंबे समय तक जिम्मेदारी टालने की प्रक्रिया चलती रही:
झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण: दावा किया कि मांगी गई जानकारी नगर रचना विभाग के पास उपलब्ध है।
नगर रचना विभाग: अपनी जिम्मेदारी हटाते हुए मामला स्थापना विभाग पर डाल दिया।
स्लम विभाग: कागजात उपलब्ध कराने में पूरी तरह असमर्थता व्यक्त की।
विभागों के इस रवैये पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सूचना आयोग ने मनपा को निर्देश दिए हैं कि वह इंदिरानगर स्थित रो-हाउस जीपी एरिया का प्रमाणित नक्शा और पीडीएस की प्रति अपीलकर्ता को 15 दिनों के भीतर नि:शुल्क प्रदान करे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो मनपा को इसका ठोस कारण शपथपत्र (हलफनामे) के जरिए प्रस्तुत करना होगा।


