हनुमानगढ़| क्षेत्र में सिंचाई और पीने के पानी की गंभीर किल्लत को दूर करने की मांग को लेकर किसानों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। भाखड़ा नहर प्रणाली और इंदिरा गांधी नहर परियोजना से पानी की पर्याप्त और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर करीब 35 गांवों के किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ भारी संख्या में जिला मुख्यालय पर आयोजित महापंचायत में शामिल होने पहुंचे। संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक रघुवीर वर्मा के अनुसार, प्रशासन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद फसलों की सिंचाई के लिए नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप, सूख रही फसलें
किसान नेताओं ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर गंभीर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। किसान सभा के तहसील अध्यक्ष गुरचरण सिंह ने बताया कि पिछले तीन सप्ताह से भाखड़ा मुख्य नहर में पानी की भारी कमी बनी हुई है। इस जलसंकट के कारण क्षेत्र के 35 गांवों में लहलहाती गेहूं और सरसों की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी तयशुदा वरीयता क्रम के अनुसार पानी का आवंटन नहीं कर रहे हैं। आक्रोशित किसानों ने यह कड़ा निर्णय लिया है कि जब तक सिंचाई विभाग नहरों में निर्धारित हिस्से के अनुसार पानी छोड़ने का लिखित आदेश जारी नहीं करता, तब तक वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी पुलिस बल तैनात
किसानों के इस विशाल ट्रैक्टर मार्च और महापंचायत के मद्देनजर जिला पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के मुख्य मार्गों पर 500 से अधिक जवानों को तैनात किया है। इसके अलावा, एहतियात के तौर पर जिले के पांच प्रमुख प्रवेश द्वारों पर मजबूत पक्के बैरिकेड्स लगाए गए हैं।
प्रशासन के साथ वार्ता और आगे की चेतावनी
महापंचायत के बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने किसान प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता और जिला कलेक्टर की संयुक्त समिति ने किसानों के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया है। इस बीच, जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता ने सफाई देते हुए कहा कि प्रमुख बांधों में जलस्तर घटने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, और विभाग अगले चार दिनों के भीतर पानी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर देगा। वहीं, किसान संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस उच्चस्तरीय वार्ता में कोई ठोस और सकारात्मक समाधान नहीं निकला, तो किसान आगामी पांच दिनों के भीतर राज्य मार्ग पूरी तरह से जाम कर देंगे।


