अलवर। राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत आने वाले रामगढ़ क्षेत्र में फैली अरावली की प्राचीन पहाड़ियों में संदिग्ध परिस्थितियों में भड़की आग ने देर शाम तक अत्यंत विकराल रूप धारण कर लिया। पहाड़ी की सूखी झाड़ियों और घास-फूस में लगी यह आग तेज हवाओं के झोंकों के साथ तेजी से फैलती हुई सरहेटा और बर्डोद की पहाड़ियों को पार करते हुए लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गोहा की पहाड़ी तक जा पहुंची। सुदूर तक उठती आग की ऊंची लपटों को देखकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी हड़कंप मच गया। इस भीषण प्राकृतिक आपदा पर नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन, वन विभाग तथा दमकल वाहन कई घंटों तक अथक प्रयास करते रहे, किंतु आग के और अधिक क्षेत्र में फैलने की आशंका के चलते देर रात्रि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की विशेष टीम को भी घटनास्थल पर रवाना करना पड़ा।
सोमवार सुबह सरहेटा की पहाड़ियों में सुलग उठी थी आग
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, सोमवार की सुबह लगभग दस बजे सरहेटा की पहाड़ी पर अज्ञात कारणों के चलते सूखी झाड़ियों में अचानक आग सुलग उठी। तेज हवाओं के प्रभाव के कारण देखते ही देखते इस आग ने एक बड़े भू-भाग को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, वन विभाग का मैदानी अमला और दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंच गए। इसके साथ ही आसपास के गांवों से आए जागरूक ग्रामीणों ने भी हरी टहनियों और पानी के इस्तेमाल से आग को बुझाने में पूरा सहयोग प्रदान किया। दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासन ने सरहेटा और बर्डोद की पहाड़ियों के लगभग ढाई किलोमीटर के दायरे में फैली आग पर तो किसी तरह नियंत्रण पा लिया, किंतु तेज हवाओं और प्रचुर मात्रा में मौजूद सूखी घास के कारण आग की चिंगारियां आगे की पहाड़ियों की ओर बढ़ती चली गईं।
अंधेरा गहराने और गोहा की पहाड़ी तक आग पहुंचने से बढ़ी प्रशासनिक चुनौती
जैसे-जैसे शाम ढली और अंधेरा गहराया, वैसे ही आग के गोहा की पहाड़ी तक पहुंचने की सूचना से प्रशासनिक हलकों में पुनः खलबली मच गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए घटनास्थल पर दो दमकल गाड़ियों को तैनात किया गया, जबकि वन विभाग के रेंज अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी निरंतर मौके पर डटे रहकर पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। रात के समय अंधेरा होने के कारण पारंपरिक संसाधनों से आग बुझाने में आ रही भारी कठिनाइयों को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम की मदद ली गई। रामगढ़ के तहसीलदार आशीष शर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सुबह से ही प्रशासनिक टीम और ग्रामीणों के अथक सहयोग से अधिकांश हिस्सों पर काबू पा लिया गया था, किंतु गोहा की पहाड़ी तक आग के पहुंचने के बाद राहत कार्यों को और अधिक तीव्र कर दिया गया है। रात के वक्त विषम भौगोलिक परिस्थितियों और अंधेरे के बावजूद एनडीआरएफ के सहयोग से पहाड़ी के शेष बचे हिस्सों पर आग बुझाने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं।


