देवी और देवता की पूजा के समय एक दीपक जलाते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. यह दीपक घी का या फिर तेल का होता है. दीपक की बाती ठीक नहीं होती है तो वह सही से नहीं जलती है. बीच में बूझ जाती है या फिर उसकी लौ खिली-खिली नहीं होती है. इससे दीपक के अंदर चारों ओर काला घेरा भी बन जाता है. पूजा के दौरान वह दीपक बूझ जाए तो उसे अशुभ माना जाता है. इस वजह से दीपक की बाती बहुत ही सावधानी से बनाते हैं, नहीं तो वह सही से जलती नहीं है.
दो तरह की होती है दीपक की बाती
दीपक की बाती दो तरह की होती है. एक गोल बाती होती है, जो मुख्यत: घी वाले दीपक में लगाते हैं, वहीं दूसरी लंबी बाती होती है, जिसे तेल वाले दीपक के लिए प्रयोग में लाते हैं.
घी के दीपक के लिए गोल बाती बनाते हैं. इसके लिए आपको कच्चा सूत या फिर कपास वाली रुई का उपयोग करना है. सिंथेटिक रुई का उपयोग न करें. अपने हाथ में थोड़ी सी रुई लें और उस गोलकर दें. उसके बीच में ऊपर की ओर एक चोंच बनाएं और उस चोंच पर थोड़ा सा कपूर का पाउडर लगा दें. या फिर उस जगह पर कच्चा दूध लगाएं, इससे वह चोंच नुकीली हो जाएगी. फिर गाय के घी में उस बाती को डूबो दें. पूजा के समय उसे जलाएं, उसकी लौ खिली-खिली होगी और लंबे समय तक जलेगी. समय-समय पर उसमें घी डालते रहें.
लंबी बाती कैसे बनाएं?
यदि आप तेल वाले दीपक के लिए बाती बनाना चाहते हैं तो उसके लिए बाती लंबी होनी चाहिए ताकि वह अच्छे से तेल में डूब जाए और दीपक के किनारे के सहारे देर तक जलती रहे.
लंबी बाती बनाने के लिए अपने हाथ में थोड़ी सी रुई लें. उसे लंबा आकार दें, उसके दोनों छोर को पतला और नुकीला कर दें. इस प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखें कि उसे बहुत जोर से दबाकर टाइट नहीं करना है. बाती अगर बहुत टाइट होगी, तो तेल उसके ऊपर तक नहीं जा पाएगा, इससे वह बाती बीच में ही बूझ सकती है. जिस छोर से बाती को जलाना है, उस पर कपूर का पाउडर लगा सकते हैं, ताकि आसानी से जल जाए.
जलाने से पहले करें ये काम
जब आपको दीपक जलाना है, तो उससे कुछ समय पहले मिट्टी के दीपक को पानी में डालकर रख दें, फिर थोड़े देर बाद बाहर निकाल कर सुखा दें. ऐसे ही बाती को तेल में डुबोएं, इससे बाती अच्छी तरह से तेल में भीग जाएगी. जब आप दीपक जलाएंगे तो वह खिला-खिला जलेगा.


