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    मासूम की जीवनरेखा: 5 माह के शिशु को एयर एम्बुलेंस ने सुरक्षित पहुंचाया

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव सनोरिया सुमराखेड़ा के पांच महीने के मासूम यथार्थ की जिंदगी बचाने के लिए शासन और प्रशासन ने एकजुट होकर एक मिसाल पेश की है। जन्मजात हृदय रोग जैसी गंभीर चुनौती से जूझ रहे इस नन्हे बालक को उज्जैन से इंदौर और फिर वहां से हवाई मार्ग के जरिए बेंगलुरु के नारायणा अस्पताल तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार की पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजना उस संकटग्रस्त परिवार के लिए संजीवनी बनकर उभरीं, जो अपने इकलौते चिराग की नाजुक हालत को देख पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा था।

    नन्हे यथार्थ की जान पर मंडराता संकट और असाध्य बीमारी

    महिदपुर तहसील के निवासी दीपक सिंह राणावत के घर जब यथार्थ का जन्म हुआ, तो खुशियों का ठिकाना नहीं था, लेकिन जल्द ही डॉक्टरों ने यह खुलासा कर परिवार को स्तब्ध कर दिया कि बच्चा दिल की गंभीर और जटिल बीमारी के साथ पैदा हुआ है। स्थानीय स्तर पर किए गए उपचार के बावजूद जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया कि मासूम की जान बचाने के लिए अविलंब बड़े केंद्र में सर्जरी करना अनिवार्य है। समय की कमी और बच्चे की अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल दक्षिण भारत के विशेषज्ञ अस्पताल में स्थानांतरित करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि सड़क मार्ग से इतना लंबा सफर तय करना बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।

    एयर एम्बुलेंस सेवा और प्रशासनिक तत्परता का समन्वय

    जैसे ही यह संवेदनशील मामला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया, सरकारी मशीनरी ने बिना समय गंवाए सक्रियता दिखाई और पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से यथार्थ को एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई। उज्जैन से एम्बुलेंस द्वारा इंदौर लाने के उपरांत उसे विशेष चिकित्सकीय उपकरणों से सुसज्जित हवाई एम्बुलेंस में बेंगलुरु रवाना किया गया, जहां विशेषज्ञों की एक टीम निरंतर उसकी निगरानी कर रही थी। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने न केवल तकनीकी बाधाओं को दूर किया बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि सफर के हर पल में मासूम को उच्च स्तरीय मेडिकल सहायता मिलती रहे, जिससे एक असंभव लगने वाला कार्य समय रहते संपन्न हो सका।

    आयुष्मान योजना का कवच और इलाज की नई उम्मीद

    लाखों रुपये के इलाज और परिवहन के भारी खर्च से डरे हुए परिवार के लिए आयुष्मान निरामय योजना एक बड़े वित्तीय संबल के रूप में सामने आई है, जिसने सर्जरी के खर्च का बोझ अपने कंधों पर ले लिया है। हालांकि प्रक्रिया के दौरान आयुष्मान कार्ड से जुड़ी कुछ तकनीकी समस्याएं भी उत्पन्न हुईं, लेकिन प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण उन्हें तुरंत सुलझा लिया गया ताकि रेफरल और भर्ती की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो। वर्तमान में यथार्थ बेंगलुरु के प्रतिष्ठित अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में है और उसका परिवार अब इस उम्मीद के साथ सुरक्षित महसूस कर रहा है कि सरकारी योजनाओं और दुआओं के असर से उनका बेटा जल्द ही स्वस्थ होकर वापस अपने गांव लौटेगा।

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